रक्त से नहाया सेक्यूलर श्रीलंका.. बौद्धों पर अत्याचार के समय खामोश थे ईसाई, अब ईस्टर पर वो बने निशाना.. रोहिंग्या कर चुके हैं घुसपैठ

आज ईस्टर के मौके पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो आतंकी हमलों से दहल उठी है. खबर के मुताबिक़, श्रीलंका में एक के बाद एक 6 सीरियल ब्लास्ट हुए हैं, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं तथा 400 से ज्यादा लोग घायल हैं. मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका में बट्टिकलोबा, नैगोंबो और कोलंबो के चर्चों 5 में, वहीं होटल शांगरीला और किंग्सबरी सहित 3 होटलों में धमाके हुए हैं. एक के बाद एक हुए  इन धमाकों के बाद अफरातफरी का माहौल है..हर तरफ खून फैला हुआ है तता लोगों के चीखने की आवाजें आ रही हैं.

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बताया जा रहा है कि चर्चों में यह धमाके तब हुए जब लोग ईस्टर की प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे. पुलिस के मुताबिक स्थानीय समयनुसार पहला धमाका सुबह 8:45 पर हुआ. तीन ब्लास्ट होटलों तथा तीन ब्लास्ट चर्चों में हुए हैं. जिन जगहों पर ये ब्लास्ट हुए हैं वो इस प्रकार हैं- कोच्चिकडे चर्च, काटुवापिटिया चर्च, शांगरी ला होटल, सिनेमन ग्रांड होटल, बैटलिकलोआ में एक चर्च. खबरों की मानें तो इन धमाकों के पीछे इस्लामिक  चरमपंथी संगठनों का हाथ हो सकता है, हालाँकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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ज्ञात हो भारत की तरह श्रीलंका में भी रोहिंग्या उन्मादियों की घुसपैठ हो चुकी है. आज की सेक्यूलरवाद के रास्ते पर चलता श्रीलंका किस तरह मजहबी चरमपंथ की चपेट में आता जा रहा है, इसका संकेत पिछले वर्ष ही उस समय मिल गया था, जब श्रीलंका में मजहबी चरमपंथियों ने चुन-चुन कर बौद्धों तथा उनके धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया था. इसके बाद श्रीलंका में बौद्धों तथा मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक हिंसा की ख़बरें भी सामने आई थीं.

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जब श्रीलंका में मजहबी चरमपंथी बौद्धों को निशाना बना रहे थे, बौद्धों के धार्मिक प्रतीकों पर हमले कर रहे थे, बौद्धों की हत्याएं कर रहे थे..तब वहां के ईसाई मौन थे. उन्मादियों के खिलाफ ईसाइयों की ये खामोशी अब उन पर भारी पड़ गई है. आज दुनिया भर के ईसाई ईस्टर के पर्व को मना रहे थे, तब आतंकियों ने श्रीलंका में चर्चों को निशाना बनाया. कोलंबो के एक चर्च में इतनी जोर से धमाका हुआ कि चर्च की छत पूरी तरह से उड़ गई.

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पिछले कुछ सालों में श्रीलंका में चरमपंथी हमले काफी बढ़े हैं लेकिन इसके बाद भी श्रीलंका ने इससे सबक नहीं सीखा. श्रीलंका के सेक्यूलरिज्म का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब पूरी दुनिया ने आतंकी मुल्क पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने से इनकार कर दिया था, उसके बाद भी श्रीलंका की क्रिकेट टीम पाकिस्तान खेलने गई थी. इस दौरान इस्लामिक आतंकियों ने श्रीलंकाई क्रिकेटरों की बस को निशाना बनाया था, भयंकर गोलीबारी की थी. इसके बाद भी श्रीलंका में बौद्धों को निशाना बनाया गया लेकिन श्रीलंका सतर्क नहीं हुआ तथा रोहिंग्याओं को शरण देता था, जो भारत की तरह उसके लिए भी नासूर बनते जा रहे हैं.

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श्रीलंकाई मीडिया ने बताया कि पहला धमाका कोलंबो में सैंट एंटनी चर्च और दूसरा धमाका राजधानी के बाहर नेगोम्बो कस्बे के सेबेस्टियन चर्च में हुआ. वहीं तीसरा धमाका पूर्वी शहर बाट्टिकालोआ के चर्च में हुआ. इसके अलावा जिन होटलों को निशाना बनाया गया है, उनमें द शांगरीला, द सिनामॉन ग्रैंड और द किग्सबरी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि दमकल विभाग समेत पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई है और घायलों का कोलंबो के नेशनल हॉस्पिटल मेंंइलाज चल रहा है, इसके अलावा कोलंबो सहित कई अन्य जगहों पर सेना की भी तैनाती कर दी गई है.

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