इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया में अपने अधिकारी की गंदी बातें और गंदी मांग को फोन में टेप कर न्याय मांगने वाली महिला का हुआ ये हाल


ये घटना दुनिया के सबसे बड़े इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया की है जहाँ एक महिला को उसका बॉस परेशान करता था. महिला का बॉस महिला को फोन कर अश्लील बातें करता तथा उससे गंदी डिमांड करता था. बॉस को सबक सिखाने के लिए महिला ने उसकी बातों को ये सोचकर रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया कि ये दिखाकर वह अदालत से न्याय मांगेगी तथा बॉस को सजा दिलायेगी. लेकिन अदालत ने इसके बाद जो फैसला सुनाया, उससे पूरी दुनिया दंग रह गई. अदालत ने महिला को ही फोन कॉल रिकॉर्ड करने, और उसे सर्कुलेट करने के मामले में 6 महीने की सजा सुना दी.

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मामला इंडोनेशिया के लाबुआपी का है जहाँ नुरिल मकनुन नामक महिला एक स्कूल में बुककीपर का काम करती हैं. नुरिल की उम्र 41 साल है. वो तीन बच्चों की मां हैं. उन्होंने 2013 में लोम्बोक के एक हाईस्कूल में पार्ट टाइम बुककीपर के तौर पर काम करना शुरू किया. सब सही चल रहा था. उसके बाद उसी स्कूल में नया प्रिंसिपल आया जिसने आते ही महिला के साथ छेड़खानी शुरू कर दी तथा उसको फोन ओअर अश्लील बातें व शारीरिक संबंध बनाने की डिमांड शुरू कर दी.

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जब महिला अपने बॉस से तंग आ गई तो उसने उसकी रिकॉर्डिंग करना शुरू कर दिया ताकि वह बॉस को सजा दिला सके. जब बॉस को ये पता चला कि नुरिल ने उसकी रिकॉर्डिंग की है तो उसने रिल के खिलाफ मानहानि का केस कर दिया. पुलिस ने जांच की और नुरिल को एक महीने की जेल हो गई. इसके बाद मामला कोर्ट गया तथा इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया के कोर्ट ने भी महिला को ही दोषी ठहरा दिया तथा नुरिल पर छह महीने की जेल और 35 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया गया. कोर्ट ने ये कहा कि अगर वो ये रकम नहीं देती है तो उन्हें तीन महीने और जेल की सजा काटनी होगी.

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कोर्ट के फैसले के बाद नुरिल ने कहा कि वो महिलाओं की गरिमा के लिए लड़ने पर गर्व महसूस कर रही हैं. पर सवाल ये है कि उन्हें जेल क्यों भेजा गया, जबकि भद्दी बातें तो उस इंसान ने की थीं. तो फिर उसे क्यों नहीं. वो इंसान साफ-साफ कुबूल रहा है कि रिकॉर्डिंग में वो आवाज उसकी है, वो ये भी मान रहा है कि उसने ही कॉल किया है और सारी बातें भी वो ही बोल रहा है. फिर भी कोर्ट ने महिला को ही दोषी माना तथा उसे जेल की सजा सुना दी. नुरिल ने कहा कि वो कोर्ट की रूलिंग से निराश हैं. कोर्ट का फैसला सरासर गलत है, नाइंसाफी है. वो एक महिला हैं और उन्हें महिला की तरह प्रोटेक्ट किया जाना चाहिए. पर वो एक पीड़ित बन गई.

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