जब आस्ट्रेलिया में समलिंगी विवाह का कानून हुआ था लागू, तब जा कर खुला था वहां की मस्जिद के इमाम नूर का एक बड़ा राज़

एक लम्बे प्रयासों के बाद आख़िरकार आस्ट्रेलिया ने समलिंगी विवाह का अधिकार कानूनी रूप से पास करवा ही लिया था जिसके बाद वहां मर्द की मर्द से और औरत की औरत से शादी हो गई वो भी पूरे वैध रूप में . कानून पास होते ही कई समलिंगी जोड़ों ने खुल कर इजहार किया और वहां पर जश्न मनाया गया था . इसी ख़ुशी में वहां रहने वाले कई समलैंगिक जोड़े शादियां कर रहे हैं लेकिन इनके बीच एक नई समस्या सामने आई है जो मुस्लिमो से सम्बन्ध रखती है .

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असल में ये समस्या जुडी है वहां रहने वाले उन मुसलमानो से जो खुद समलिंगी हैं और इस कानून के तहत अपना नया घर बसाना चाह रहे हैं . लेकिन ऑस्ट्रेलिया में रह रहे मुस्लिम समलैंगिकों या वे समलैंगिक लोग जो मुस्लिम परिवारों में पैदा हुए उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यहां तक कि समलैंगिक धार्मिक गुरुओं को भी अपनी ज़िंदगी ख़तरे में महसूस हो रही है. वहां उन्हें तमाम तरह की कट्टरपंथी धमकियाँ दी जा रही हैं और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी .

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इसी क्रम में अष्ट्रेलिया के एक नामी मस्जिद के इमाम नूर वारसेम का भी नम्बर आता है . ये ऑस्ट्रेलिया की एक मस्जिद में इमाम थे और इस्लामिक शिक्षा देते थे . उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि उनका स्वभाव कैसा है . जब आस्ट्रेलिया में ये कानून लागू हुआ तो ख़ुशी ख़ुशी में उन्होंने भी खुद को समलिंगी होने का राज खोल दिया लेकिन उसके बाद शुरू हो गये उनके बुरे दिन . ये हालात ठीक भारत के तीन तलाक कानून से मिलते जुलते हैं जहाँ सुप्रीम कोर्ट एक आदेश और सरकार के द्वारा नियम बनाए जाने के बाद भी उसको आये दिन कट्टरपंथी समाज द्वारा चुनौती दी जाती है ..

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फिलहाल मस्जिद के इमाम नूर का कहना है कि वो कहते हैं कि कोई भी उनकी ज़रूरतों को नहीं समझ सकता है. इमाम नूर वारसेम कहते हैं, “मुझे लगता है कि कोई और इमाम समलैंगिकता या इससे संबंधित मुद्दों पर बात नहीं करेंगे. लेकिन मैं अपने कमरे में क्या कर रहा हूं उसे सार्वजनिक रूप से बोलना ठीक नहीं है.” हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में समलैंगिक विवाह को मान्यता तो मिल गई है, लेकिन मुस्लिम समाज में इसे अभी भी स्वीकृति नहीं मिली है. नूर वारसेम का समलैंगिक होने का पता चलने पर उन्हें इमाम के काम के साथ-साथ मस्जिद में नमाज पढ़ने से भी रोक दिया गया. वो कहते हैं, “पहली बात यह थी कि मैंने अपनी मस्जिद खो दी, मुझे प्रार्थना करने या कराने की अनुमति नहीं थी. इससे मेरे दिल को चोट पहुंचती है.”

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नूर उस समय चर्चा में आये थे जब पांच साल पहले मुस्लिम समाज के समलिंगी युवाओं का एक समूह प्रार्थना के लिए मस्जिद के बाहर इकट्ठा हुआ , उस समय सबने उनके मस्जिद में घुसने पर आपत्ति जताई थी लेकिन अपनी विचारधारा का होने के कारण नूर वारसेम ने उन समलिंगी युवाओं की मदद की. वो कहते हैं, “उन युवाओं को जिन्हें मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं थी, यह समूह उसका विकल्प था. मैंने उनसे कहा कि मैं आपके साथ लड़ूंगा.” नूर वारसेम बताते हैं, ”मैं सोशल नेटवर्क के जरिए मिस्र में एक व्यक्ति से बात कर रहा हूं. उसका बेटा समलैंगिक है. पिता अपने लड़के के बारे में बहुत चिंतित हैं. वो मुझसे पूछ रहे हैं कि उनके बेटे की इस बीमारी को कैसे ठीक करें? मैंने उनसे कहा कि यह उनके या उनके बेटे की ग़लती नहीं है. इसे सहनशील आंखों से देखा जाना चाहिए.”

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इसी समस्या से ग्रसित एक अन्य मुस्लिम युवा हुसैन वली कहते हैं कि समाज से मिलने वाले तानो को ले कर “मैंने आत्महत्या की कोशिश की” इतना ही नहीं सिडनी में रहने वाला युवा हुसैन वली का परिवार उनके समलिंगी होने की जानकारी के बाद उनसे अलग हो गया .हुसैन वली की शरीर की बनावट और महिलाओं की तरह दिखने वाले उनके चेहरे की वजह से उन्हें हर जगह समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार तो यह उत्पीड़न की हद तक चला जाता है. हुसैन वली के अनुसार ”जब मैं पांच साल का था तब मुझे जिस्मानी तौर पर परेशान किया गया, कई बार यौन उत्पीड़न तक किया गया, उन लोगों ने कई बार मुझे मानसिक रूप से परेशान किया, कई बार तो मैंने आत्महत्या तक की कोशिशें की.” हुसैन वली के परिवारवालों को लगा कि उन्हें समलैंगिकता की लत लग जाएगी. इसलिए परिवार के लोगों ने उन्हें मस्जिद भेजा, लेकिन उनके शरीर और मानसिक बदलाव को स्वीकार नहीं किया गया.

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