भारत और भूटान के रिश्तों को हिमालय की तरह मजबूत कर आये नरेंद्र मोदी.. बेबस हो कर बस देखता रह गया चीन


थिम्पू/नई दिल्ली: आये दिन मात्र घुड़कियाँ देने वाले चीन का सुख चैन फिर से छीन लिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने.. पड़ोसी देशों पर धौंस जमाने की चीन की कुनीति को भारत ने पड़ोसी देशों से प्रेम दिखा कर सुनीति कर के पस्त कर दिया है..इसी नीति के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा बेहद सफल मानी जा रही है। मोदी ने लोतै शेरिंग से विभिन्न विषयों पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय भागीदारी को और प्रगाढ बनाने के कदमों पर चर्चा की गई दोनों देशों ने अपने संबंधों में नयी ऊर्जा का संचार करने के लिए 10 सहमति करार पर हस्ताक्षर किए..

फिलहाल चीन को इतना सन्देश जरूर चला गया है कि उसकी दादागीरी कम से कम भारत और उसके मित्रो पर नही चलने वाली..मोदी दूसरी बार भूटान आए हैं और इस साल मई में फिर से निर्वाचित होने के बाद उनकी यह पहली यात्रा है। उन्होंने मांगदेछू पनबिजली ऊर्जा संयंत्र का शुभारंभ किया और भारत-भूटान पनबिजली सहयोग के पांच दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में टिकट भी जारी किए। इस मुलाकात पर दुनिया भर की नजर थी और विशेष  तौर पर चीन की..

ऐतिहासिक सिमटोखा जोंग स्थल पर अपने भूटानी समकक्ष के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘मैं दूसरे कार्यकाल के आरंभ में भूटान आकर बहुत खुश हूं.’..दोनों देशों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, विमानन, आईटी, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में 10 सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने शब्दरूंग नामग्याल द्वारा 1629 में निर्मित सिमटोखा जोंग में खरीदारी कर रूपे कार्ड की भी शुरुआत की। सिमटोखा जोंग भूटान में सबसे पुराने स्थलों में एक है और यह मठ और प्रशासनिक मामलों का केंद्र है.


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