रोहिंग्या जैसे क्रूर आतंकियों के लिए मानवाधिकार मांगते संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर हुआ आतंकी हमला

आतंक किसी का सगा नहीं है , ये वो सोच और विचारधारा है जो किसी को भी न चैन से जीने देगी और न खुद भी चैन से जीना चाहेगी . दुनिया के लगभग हर आतंकी हमलो में एक चीज कॉमन होती है जिसे तमाम देश देख कर भी और जान कर भी अनदेखा कर देते हैं और इसी के चलते उन्हें खुद भी उठानी पड़ती है हानि . ज्ञात हो कि संसार में मानवाधिकार के सबसे बड़े पैरोकारों में से एक संयुक्त राष्ट्र भी अब आतंक की इस काली छाया से अछूता नहीं रहा और खुद हुआ इसका शिकार .

ये वही संयुक्त राष्ट्र है जिसने अभी हाल में ही रोहिंग्या के लिए लगातार आवाज उठाई थी और म्यांमार को लगातार चेतावनी देता रहा , जबकि म्यन्मार लगातार प्रमाण देता रहा कि रोहिंग्या उन्मादियो ने उनके देश में बहुत आतंक मचा रखा था .  विदित हो कि गत मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र संघ का सोमालिया स्थित कार्यालय बनाया गया है आतंकियों द्वरा निशाना . संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय पर हुए इस अतिदुस्साहसिक हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक आतंकी समूह अल-शबाब ने ली है और आगे भी ऐसे हमले जारी रखने की चेतावनी दी है . गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र कर्मियों के खिलाफ जानबूझकर किया गया यह सशस्त्र हमला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।

उन्होंने सोमाली अधिकारियों से हमले की जांच करने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तेजी से न्याय के दायरे में लाने का आग्रह भी किया है.  इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमालिया की राजधानी मोगादिशु स्थित संरा परिसर में मंगलवार को हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए घायल सहकर्मियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की है। गुटेरेस ने गुरुवार को एक बयान में कहा,”इस तरह की घटना को अंजाम देकर सोमालिया में शांति और स्थिरता कायम करने तथा सोमालियाई लोगों और सरकार को समर्थन जारी रखने के संयुक्त राष्ट्र के मजबूत संकल्प को कम नहीं किया जा सकता।

 

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