एक भारतीय ईसाई जिन्दा लौट आया ISIS के चंगुल से बाकी सब मार डाले गये.. भारत में उसने सबको बताई थी झूठी कहानी पर सच कुछ और था


जिन्दगी और मौत का आधार इंसानियत नहीं बल्कि मजहबी था वहां. हर किसी को वहां पर ये साबित करना था कि वो कौन हैं और उनका दीन और ईमान क्या है . जो उनके साथ का नहीं था वो मार डाला गया और जो साथ के थे उनको छोड़ दिया गया .. आतंक का मत और मजहब अगर सिखाया गया होता उन सभी 39 बेगुनाह भारतीयों को तो आज यकीनन वो जिन्दा होते क्योकि वो उस सोच से सतर्क होते जो उन्हें नकली धर्मनिरपेक्षता के पैरोकारों ने सोचने भी नहीं दिया .

ज्ञात हो कि वर्ष 2014 में इराक के मोसुल में इस्लामिक आतंकी दल ISIS द्वारा अपहरण किये गये 40 हिन्दुस्थानियो में 39 बेरहमी से मार डाले गये लेकिन एक भारतीय जिन्दा लौट आया था जिसका नाम था हरजीत मसीह . वो कैसे बच कर आया ये बाद में पता चला उस से पहले उसने तमाम जांच एजेंसियों पर खुद को परेशान करने का आरोप लगा दिया था जिस से उसका सच छिपा रहे . यहाँ तक कि वो उस समय कैद में रहे उन 39 और लोगों की चिंता बिलकुल नहीं कर रहा था जिनकी जान बचाने के लिए वो एक अहम कड़ी साबित हो सकता था .. उसने छिपा कर रखा सत्य और मारे गये वो सभी 39 भारतीय .

मसीह ने बताया था कि उसको और उसके तमाम साथियों को एक रोज हम सभी को कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए। इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं। मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा। बाकी सभी लोग मारे गए।’ मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया। इस बात पर जांच एजेंसियों को यकीन नहीं आया क्योकि उसके पैरो में गोली के निशान आदि ऐसे तमाम प्रमाण थे जिस से लग रहा था कि वो झूठ बोल रहा है .

इस सच से पर्दा उठा है और बाद में पता चला कि वहां 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर एक साथ ले जाया गया था.. इस्लामिक आतंकियों ने उन सभी को कत्ल करने का फैसला किया था जो मुसलमान नही थे .. इसको भांप कर ईसाई हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा. हरजीत मसीह ने अपने मालिक के संग जुगाड़ करके अपना नाम अली किया और बांग्लादेशियों वाले समूह में शामिल हो गया। असल में इस्लामिक आतंकियों ने बंगलादेशियो को मुसलमान जान कर छोड़ दिया था .  इस प्रकार आतंक का मत और मज़हब नहीं है कहने वालो के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वो वजह क्या है जो बंगलादेशी छोड़ दिए गये और हिन्दुस्तानी कत्ल कर दिए गये ? 


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