सामने आया भारत की सेना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट का राज.. पढ़ें और अनुमान लगाएं कहाँ तक पहुँच गया है कट्टरपंथ?

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद की जम्मू कश्मीर को लेकर आयी रिपोर्ट पर अब बड़ा सच सामने आया है. बिलकुल वही सच जिसकी आशंका जताई जा रही थी किइस रिपोर्ट में जानबूझकर एक साजिश के तहत भारतीय सेना तथा भारत सरकार पर सवाल उठाये गए हैं. खबर के मुताबिक, यूएन के मानवधिकार संस्था के प्रमुख तथा रिपोर्ट बनाने वाले जैद राद अल हुसैन की एक तस्वीर सामने आई है जिसमे जैद राद अल हुसैन पाकिस्तानी अलगाववादी नेताओं और कुछ पाकिस्तानी ISI एजेंटों के साथ नजर आ रहे हैं. गौरतलब है कि अभी कुछ ही दिनों पहले जैद राद अल हुसैन ने कश्मीर को लेकर अपनी एक रिपोर्ट यूएन में पेश की थी और कहा था कि कश्मीर में मानवधिकार का उल्लंघन हो रहा है. लेकिन अब यूएन में मानवधिकार संस्था के प्रमुख की तस्वीर ISI एजेंटों के साथ सामने आने पर बवाल मच गया है तथा साफ़ पता चल रहा है कि ये रिपोर्ट किस तरह से भारत को बदनाम करने के मकसद से बनाई गई है.

 


जानकारी मिली है कि इस तस्वीर में जो लोग जैद राद अल हुसैन के साथ नजर आ रहे हैं उनमें पाकिस्तान में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता फैज नक्कुशबंदी, सरदार अहमज युसूफ, अल्ताफ हुसैन और गुलाम हसन शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक जेनेवा में जैद राद अल हुसैन आईएसआई लॉबी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. 4 जून को कश्‍मीर पर यूएन की रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले हुसैन ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कथित तौर पर मानवधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा शक्ति के अधिक इस्तेमाल और पैलेट गन का भी इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। इस रिपोर्ट में बेहद ही विवादित तरीके से भारत को लेकर कहा गया था कि भारत को कश्मीर के लोगों के आत्म निर्धारण को सम्मान प्रदान करना चाहिए. यूएन के मानवधिकार संस्था के प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने अपनी रिपोर्ट में कश्मीर में जुलाई 2016 से हुई सभी लोगों की मौत की जांच की मांग भी की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कश्मीर में सीरिया जैसी स्थिति का भी जिक्र किया था। इतना ही नहीं मानवधिकार संस्था के प्रमुख का कहना था कि कश्मीर में मानवधिकारों के उल्लंघन के मामले में एक बड़ी अंतराष्ट्रीय जांच आयोग बनाया जाये।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने इसपर कड़ा एतराज जताया था। भारत ने यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट को गलत और बहकाने वाला बतलाया था। भारत की तरफ से कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हम किसी बाहरी की दखलअंदाजी बर्दाशत नहीं है। भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि यह भ्रामक, पक्षपातपूर्ण और प्रेरित है. भारत की तरफ से कहा गया था कि इस रिपोर्ट को अपु्ष्ट सूचना के आधार पर तैयार किया गया है और यह रिपोर्ट भारत की संप्रभूता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती है। भारत की तरफ से साफ कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने भारत के इस राज्य के एक हिस्से पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है तथा भारत मानवाधिकार का उललंघन नहीं कर रहा है बल्कि अपनी संप्रभुता तथा अखंडता कि रक्षा कर रहा है.

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