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खून से सने हाथों वाले इस्लामिक आतंकी दल तालिबान के लिए नाटो का बयान नकली सेकुलरों के लिए है एक बहुत बड़ी सीख

इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान के खिलाफ़ अमेरिका के नेतृव वाली नाटो सेना ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. नाटो के साथ शांतिवार्ता के इशारे कर रहे इस्लामिक आतंकी तालिबान को जो जवाब दिया है वो तथाकथित सेक्यूलर लोगों के लिए एक सीख है, एक आईना है. नाटो ने साफ तौर पर कहा दिया है कि तालिबान के साथ अमेरिका किसी प्रकास से सीधी बातचीत नहीं करेगा. इससे पहले जो दावे किए जा रहे थे वो सभी बेबुनियादी थे. इसको लेकर चल रही खबरों को नाटो ने नकार दिया है.

नाटो के अफगानिस्तान मिशन ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिसमें उनके कमांडर के अमेरिका के तालिबान के साथ सीधी बातचीत को तैयार होने का दावा किया गया था. अमेरिकी जनरल जॉन निकोलसन ने कंधार में अफगान अधिकारियों के साथ बातचीत की और कथित रूप से कहा कि अमेरिका तालिबान के साथ बातचीत करने को ‘तैयार’ है. अधिकारी के इस बयान को अमेरिका के पुराने रूख में बड़ा बदलाव माना जा रहा था. निकोलसन ने एक बयान में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और वह सिर्फ अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ द्वारा जून में दिये गये बयान को दोहरा रहे थे कि अमेरिका शांति वार्ता का समर्थन करने और उसमें भाग लेने को तैयार है.

नाटो के ‘रेसोल्यूट सपोर्ट मिशन’ की ओर से जारी बयान के अनुसार, निकोलसन ने कहा, ”अमेरिका अफगान या अफगानिस्तान सरकार का विकल्प नहीं है।’ मिशन के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट ओ’डोनेल ने कहा कि शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है। लेकिन यह वार्ता अफगानिस्तान के नेतृत्व में ही होगी. नाटो का मानना है कि वह अफगानिस्तान में शांतिवार्ता के लिए नहीं आये हैं बल्कि आतंकवाद के खात्मे के लिए आये हैं. अगर तालिबान को शांतिवार्ता करनी है तो अफगानिस्तान से करे, नाटो तो उसके खिलाफ बंदूकों का उपयोग करेगा.

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