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आतंकियों पर कहर बनकर टूटी अफगानिस्तान सेना… मार गिराए तालिबान के 62 आतंकी

आतंकी हमले से लगातार लहूलुहान हो रहे अफगानिस्तान ने अब आतंकियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तथा बड़ी कार्यवाही शुरूं कर दी है. खबर के मुताबिक़, अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकी हमलों के जवाब में आतंकियों पर सुरक्षा बलों ने जोरदार हवाई हमले किए हैं. सुरक्षा बलों की इस जवाबी हमले से आतंकवादियों को गहरा आघात पहुंचा है. इस बाबत सैन्य सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार कार्रवाई में कम से कम 62 आतंकियों और इनके कमांडर के मारे गए हैं.इस सैन्य अभियान से जुड़े अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सेना ने आतंकियों के गढ़ में विमानो के मदद से जबरजस्त हमला किया गया है. विमानो ने दिन में कई बार तालिबानी आतंकियों के ठकाने पर जोरदार हमले किए हैं. सेना की इस कार्रवाई में तालिबान कमांडर के साथ कई आतंकियों के मारे जाने की खबर है.

गौरतलब है कि पिछले दिनों आम लोगों को कई आत्मघाती आतंकी हमले का शिकार बनाया गया है. हालांकि इसके लिए अफानिस्तान की आईएसआईएस को दोषी ठहराया गया जो इराक के अल-बगदादी के संगठन के तर्ज पर काम करता है. आम लोगों के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों को भी निशाना बनाया गया. अफगानिस्तान के पश्चिमी फराह प्रांत में तालिबान से जुड़े आतंकियों ने शनिवार को एक जांच चौकी पर हमला किया. इस बरबर हमले में 11 सुरक्षा कर्मियों को मार दिया गया है. इस आतंकी हमले को लेकर प्रांत के गवर्नर मोहम्मद नसीर मेहरी के हवाले से कहा गया है कि यह हमला बुलुक जिले मे किया गया है. इस मुटभेड़ में 11 सैनिक मारे गये हैं, जबकि चार घायल हुए हैं. इस मुटभेड़ में 9 आतंकी भी मारे गए हैं. इसके अलावा शुक्रवार रात को भी आतंकियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमला है जो शनिवार सुबह तक चलता रहा। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी वैसे तो किसी आतंकी संगठन ने नहीं लिया है लेकिन खुफिया जानकारी के आधार पर प्रांत के गवर्नर ने इसके लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है.

देखने में आ रहा है कि हाल में एक खास रणनीति के तहत सुरक्षा बलों पर अपने हमलों को तेज कर दिया है. वास्ताव में इसके पीछे का कारण पाकिस्तान की भूमिका है. अमेरिका ने पाकिस्तान की आतंक समर्थक नीति के कारण अफगानिस्तान की राजनीति से उसके हस्ताक्षेप को पूरी तरह से रोक दिया है. इसी लिए पाकिस्तान अमेरिका को किसी भी हालत में अफगानिस्तान में सफल नहीं होने देना चाहता है और अपने समर्थक आतंकियों की मदद से हमले करा रहा है. यही कारण है अब अफगानिस्तान को लगने लगा है कि अगर वह अब भी नहीं जाएगा तो अफगानिस्तान का भविष्य अंधकारमय हो सकता है.

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