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सुदर्शन की खबर व सरकार का दबाव दिखा रहा असर… बांग्लादेश ने माना कि भारत से उनके देश में घुसे 1300 रोहिंग्या

म्यांमार में बौद्धों तथा हिन्दुओं के हत्यारे रोहिंग्या आक्रान्ताओं के खिलाफ सुदर्शन  ने जो अभियान चलाया था, उसका सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है. बताया जा रहा है कि इस वर्ष की शुरुआत में करीब 1300 रोहिंग्याओं को भारत से बंगलादेश भेजा जा चुका है. रोहिंग्याओं को वापस भेजने के भारत के इस कदम की यूनाइटेड नेशंस और कई मानवाधिकारी संगठन आलोचना कर रहे हैं. इनका कहना है कि भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय कानून का पालन नहीं किया है. यूएन और दूसरे संगठनों ने भारत पर आरोप लगाते हुए यह‍ भी कहा है कि म्‍यांमार में संभावित खतरे के बीच रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस भेजना कानून तोड़ने के जैसा है.

भारत ने यूएन रिफ्यूजी कनवेंशन को साइन किया है. साल 2018 में भारत में 230 रोहिंग्‍या मुसलमानों की गिरफ्तारी हुई थी. इंटर सेक्टर कोआर्डिनेशन ग्रुप (आईएससीजी) की प्रवक्ता नयना बोस ने बताया है कि तीन जनवरी से रोहिंग्या मुसलमानों का बांग्‍लादेश पहुंचना तेज हो गया है. अभी तक की जानकारी के मुताबिक इस वर्ष अब तक 300 परिवारों के करीब 1300 लोगों को भारत की ओर से बांग्‍लोदश भेजा जा चुका है. आईएससीजी में यूएन की कई एजेंसियां और कुछ और विदेशी मानवीय संगठन शामिल हैं. बताया जा रहा है कि सीमा पार करके बांग्लादेश आए लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और कॉक्स बाजार भेज दिया है. कॉक्स बाजार बांग्लादेश के दक्षिण का एक जिला है जहां दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर है.

गौरतलब है कि भारत में गैरकानूनी रूप से दाखिल होने के आरोप में 2012 से जेल में बंद सात रोहिंग्या मुसलमानों को पुलिस ने असम-म्यांमार बॉर्डर पर भेजा था तथा इसके बाद 5 अन्य को भी भेजा था. वहीं अब कहा जा रहा है कि 1300 रोहिंग्याओं को भारत से बंगलादेश भेजा गया है, जिसके बाद यूएन तथा मानवाधिकारी भारत सरकार पर भड़क उठे हैं.

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