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इस्लामिक आतंकवादियों से चीख उठे ब्रिटेन ने जिसे चुना नया प्रधानमंत्री वो माने जाते हैं मुसलमानों के दुश्मन.. जानिये उनके पहले के बयान

तमाम जद्दोजहद के बाद बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बन चुके हैं. उन्होंने हाल ही में पीएम पद की रेस में जेरेमी हंट को मात दी थी. इस्लामिक चरमपंथ के आक्रामक विरोधी माने वाले बोरिस जॉनसन को कंजरवेटिव पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पीएम के रूप में चुना. यूनाइटेड किंगडम UK के नवनियुक्त पीएम बोरिस जॉनसन की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की जा रही है जो खुद इस्लामिक आतंक के खिलाफ आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं.

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बोरिस जॉनसन पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगता रहा है. उनकी पहिचान एक ऐसे नेता की है जो इस्लाम का विरोधी है तथा अक्सर विरोधी बयान देते रहते हैं, इस्लाम के खिलाफ लेख लिखते हैं. इस्लाम को लेकर उनके बयानों तथा लेखों को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है. बोरिस जॉनसन ने साल 2018 में टेलीग्राफ में लिखे कॉलम में इस्लाम धर्म को मानने वाली महिलाओं पर टिप्पणी की थी, जिस पर काफी हंगामा हुआ था. उन्होंने लिखा था- बुर्का पहनने वाली महिलाएं किसी लेटरबॉक्स या बैंक लुटेरों की तरह लगती हैं. इस तरह के लोग लेटर बॉक्स की तरह दिखते हुए सड़कों पर घूमना पसंद करते हैं.

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इसके अलावा बोरिस जॉनसन ने अपने एक लेख में कहा था कि  कि दुनिया के कई हिस्सों में इस्लाम ने विकास का रास्ता अवरुद्ध कर दिया. उन्होंने लेख में लिखा था कि मुस्लिम दुनिया जितना पिछड़ती गई, उतनी ही ज्यादा कड़वाहट और संशय की भावना जन्म लेती गई. दुनिया भर में आप वैश्विक संघर्ष के जितने बिंदुओं के बारे में आप सोच सकते हैं- बोस्निया से फिलिस्तीन, इराक से लेकर कश्मीर तक, उसमें कुछ मात्रा में मुस्लिम असंतोष की भावना शामिल रही है.

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जॉनसन ने साल 2006 में एक किताब लिखी जिसका नाम द ड्रीम ऑफ रोम था. उसमें उन्होंने लिखा था, इस्लाम के बारे में कुछ ऐसा जरूर होना चाहिए, जिससे यह समझने में मदद मिल सके. मुस्लिम दुनिया में बु्र्जुवा, नवउदारवाद, और लोकतंत्र का प्रसार क्यों नहीं हो सका. उनका नजरिया था कि दुनिया की प्रगति रोकने में इस्लाम धर्म की भूमिका ज्यादा रही है. जॉनसन ने लिखा था, रोमन/बैजेंटाइन साम्राज्य के शासन में कॉन्सटैंटनोपल शहर में ज्ञान की धारा हजारों सालों तक बहती रही जबकि ऑटोमन साम्राज्य में 19वीं सदी की शुरुआत तक इस्तांबुल में पहली प्रिटिंग प्रेस भी नहीं आ सकी. कोई तो ऐसी चीज थी जिसने उसे सदियों पीछे कर दिया.

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द गार्जियन के मुताबिक, 2007 में “And Then Came the Muslims” शीर्षक वाले एक लेख में जॉनसन ने विंस्टन चर्चिल की पंक्तियों को कोट किया था- दुनिया में इस्लाम से ज्यादा पीछे धकेलने वाली कोई ताकत नहीं है. बतौर जॉनसन, यह वक्त है कि हम गहराई में उतरें और चर्चिल से लेकर पोप तक के आरोपों की जांच करें. इस्लामिक दुनिया की असली समस्या इस्लाम ही है. हमें ईमानदार होना पड़ेगा और यह स्वीकार करना होगा कि चर्चिल के धर्म के सामाजिक और आर्थिक परिणाम के विश्लेषण में काफी सच्चाई है. उन्होंने लिखा था कि चर्चिल के धर्म के विश्लेषण में विचार काफी तथ्यात्मक थे. हमें सच्चाई के साथ दुनिया के पीछे रहने का कारण इस्लाम में खोजना पड़ेगा.

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