पनाह दे कर तबाह बंगलादेश . रोहिंग्या का एलान – “नहीं जायेंगे वापस म्यन्मार” .. दिल्ली में मौजूद रोहिंग्या पहले ही यही एलान कर चुके हैं

मात्र कुछ दिन पहले की बात है जब दिल्ली स्थित रोहिंग्या ने साफ़ साफ कहा था कि वो वापस म्यन्मार नहीं जायेंगे भले ही उनके शिविरों पर बम मार कर उन्हें मार दिया जाय . यद्दपि ये तमाम बातें उनकी न सिर्फ दिखावा थी बल्कि २०१९ के चुनावों से पहले रोहिंग्या पसंद लोगों के वोटो के ध्रुवीकरण की एक सोची समझी साजिश भी थी .. अब लगभग वैसी ही स्थिति का सामना करना शुरू किया है उस बंगलादेश ने जो खुद ही एक इस्लामिक मुल्क है लेकिन नहीं रखना चाहता अपने देश में. सवाल अब ये भी खड़े होने शुरू हो चुके हैं कि क्या तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की सीमा भारत के बाहर जाते ही समाप्त हो जाती है ?

ज्ञात हो कि अपने देश से बौद्धों के हत्यारों को निकाल कर वापस करने के लिए तैयार बंगलादेश अब फंस रहा है एक नई मुसीबत में . उसके खिलाफ भी अब रची जा रही है एक बड़ी साजिश और वहां रोहिंग्या को जबरन बसाने और उन्हें धीरे धीरे भारत में घुसपैठ करवाने की तमाम विकल्प तलाशे जा रहे हैं .  ज्ञात हो कि बंगलादेश में मौजूद रोहिंग्या के वापस जाने की तिथि निर्धारित हो जाने के बाद भी उनके म्यांमार जाने पर संदेह बना हुआ है क्योंकि उनमें से कोई अपने देश लौटना नहीं चाहता.

बांग्लादेश के शरणार्थी आयुक्त ने यह जानकारी दी. उनके अनुसार वापस जाने वाली लिस्ट में अपना नाम देख कर रोहिंग्या समुदाय के ये लोग इधर-उधर छुप गए हैं. यद्दपि अपने देश के हितों को ध्यान में रखते हुए बंगलादेश इन सभी को संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के बावजूद अधिकारी इन्हें वापस भेजने पर अड़ा हुआ है . बांग्लादेश की योजना कुल 2,260 शरणार्थियों को अभी वापस देश भेजने की है. मोहम्मद अबुल कलाम ने कहा कि यूएनएचसीआर के आकलन के अनुसार, जिन 50 परिवारों का साक्षात्कार किया गया, उनमें से कोई भी  वापस जाने को तैयार नहीं है.

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