उर्दू अखबारों पर ब्रिटेन का ये सनसनीखेज खुलासा हैरान नहीं सन्न कर दिया संसार को


पाकिस्तान अपनी इस्लामिक नीतियों को बढावा देने के लिए अखबारों का सहारा ले रहा है। ब्रिटेंन में लादेन जैसी चरमपंथी विचारधारा वाले आंतकियो को बढ़ावा दे रहा है इसलिए वह दो उर्दू अखवार ‘डेली ऑसाफ’ ” को ब्रिटेन में वितरण कर रहा है। ये अखवार पाकिस्तान से निकाले जा रहे है इन अखबारो में वे जिहादी आतंकियों को योद्धा कहते है ,पाकिस्तान वहाँ के न्यूज़ टीवी चैनलो से मिलकर इस्लाम व आतंकवाद को बढावा दे रहा है क्योकी ब्रिटेन में जो कट्टर मजहबी लोग रहते है उन्हें उर्दू अखबार के माध्यम से अपनी कट्टर गतिविधियों में शामिल करना चाहते है।

कुछ महीने पहले लंदन के पार्सन्स ग्रीन ट्यूब स्टेशन पर हुआ हमला इस साल ब्रिटेन में हुआ छठा चरमपंथी हमला था। सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के दोषी की तलाश शुरू कर दी है।ज्ञात हो कि जो उर्दू अखबार लन्दन में न्यूज़ एजेंट के पास पहुँचते हैं उनमे ये दो अखबार ‘डेली ऑसाफ’ ‘नवा-ए-जंग’ भी शामिल हैं। कुछ समय पहले इन अखबारों ने ओसामा बिन लादेन और मुल्ला उमर जैसे चरमपंथियों को श्रद्धांजलि दी और इस्लामिक आतंकियों को योद्धा कहा था । इस विषय पर ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने संयुक्त राष्ट्र में आतंक के विरुद्ध लड़ाई में नए संचार माध्यमों की भूमिका का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, ‘हमें इंटरनेट पर मौजूद आतंकवादी समर्थित सामग्री को आगे बढ़कर और तेज गति से हटाने की जरूरत है। बीबीसी संवाददाता साजिद इकबाल बताते हैं कि ये दोनों अखबार लंदन में काफी समय से छप रहे हैं। डेली ऑसाफ एक दैनिक अखबार है और वह 2002 से छप रहा है। दूसरा अखबार ‘नवा-ए-जंग’ साप्ताहिक है और वह भी 2003 से छप रहा है। ये उर्दू अखबार काफी लम्बे समय से ब्रिटेन में चल रहा है। इसको नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अब तक कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया है।
बीबीसी संवाददाता साजिद इकबाल बताते हैं कि ब्रिटेन में टीवी चैनलों पर विदेशी भाषाओं में चरमपंथ को बढ़ावा देने वाली सामग्रियां परोसी जा रही हैं।

साजिद इकबाल के अनुसार उन्होंने इस विषय पर ब्रिटेन में अलग अलग समुदायों से बातचीत की एवं उन्हें कहा की इस तरह की सामग्रियों को सरकार को रोक लगानी चाहिए और मिडिया को इस तरह की आजादी नहीं दी जानी चाहिए। ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वो चरमपंथ से निपटने की तैयारी कर रही है। पर इन सबके बीच ऐसी सामग्रियां मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में आराम से मिल रही हैं। ये गलत हाथों में न लग जाएं, इसे रोकने का फिलहाल कोई तरीका मौजूद नहीं है। उर्दू अखवार अपनी भाषा को हथियार बनाकर ब्रिटेन में आंतकी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद कर रहे हैं। ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी को इस पर कठोऱ क़दम उठाने पड़ेगे ताकि भविष्य में इस तरह के कोई आतंकी हमले न हों । 


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