वर्षो से जमे बंगलादेशी भी भागे श्रीलंका से… संयुक्त राष्ट्र से बोले – “जिन्दा निकालो हमें”


आतंक के आकाओं ने भले ही अपनी नीचता दिखा दी हो लेकिन मामला और मुद्दा यहीं खत्म नहीं हुआ है . घायलों और मृतको के परिजनों और उनकी पीड़ा को महसूस करने वालों ने अपने धैर्य को खोना शुरू कर दिया है और उन्होंने सरकार के भरोसे रहने के बजाय अपने खुद से ही प्रतिरोध करना शुरू कर दिया है .. इस बीच पीड़ित कार्ड भी खेला जाने लगा है और उन सभी घुसपैठियों को मासूम और दुखों का मारा दिखाया जाने लगा है ..

धधक उठा श्रीलंका .. मुसलमानों पर शुरू हुए भयानक हमले .. 800 मुसलमानों को तत्काल देश छोड़ देने की धमकी

विदित हो कि श्रीलंका की सरकार के तमाम आदेशो के बावजूद किसी भी हाल में श्रीलंका से न हटने पर आमादा कई वर्षों से जमे बंगलादेशियो ने श्रीलंका के सिंहलियो , बौद्धों और ईसाईयों के गुस्से को देखते हुए वहां से भागना शुरू कर दिया है . इन सभी के गुस्से को देख कर वहां रहने वाले स्थाई मुसलमानों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं क्योकि उन सभी के खिलाफ भी आम श्रीलंकाइयो में बहुत गुस्सा दिखाई दे रहा है और वो किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहते.

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बंगलादेशियो के पैरोकारों ने अब संयुक्त राष्ट्र संघ से गुहार लगाईं है और कहा है कि वो इन सभी शर्णार्थियो के जान की रक्षा के लिए कोई कदम उठाये और इनको सुरक्षित निकलने के साथ साथ इनके स्थाई पुनर्वास आदि की व्यवस्था करवाए . इस सप्‍ताह हुए सीरियल ब्‍लास्‍ट के पहले तक श्रीलंका में ईसाई और मुसलमानों के बीच हिंसा का कोई इतिहास नहीं था। श्री लंका में 7 पर्सेंट ईसाई, 10 पर्सेंट मुस्लिम, 13 पर्सेंट हिंदू और 70 पर्सेंट बौद्ध रहते हैं।

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