सीरिया धीरे धीरे बनता जा रहा शिया मुल्क.. रूसी फ़ौज से डर कर भाग रहे सुन्नियो की जमीनों पर शियाओं का होता जा रहा कब्ज़ा

एक युद्ध जो तेजी से बदल रहा है पूरी दुनिया की तस्वीर और भूगोल के साथ सामाजिक संरचना को भी हिला कर रख दिया है . दो महाशक्तियों को आपस में वर्चस्व की लड़ाई करते देखने वाले लोग ही नहीं बच रहे हैं क्योकि उसको देखने वाले या तो अमेरिका या रूस की गोली का शिकार हो रहे हैं . जो बच रहे हैं वो इजरायल , ईरान या तुर्की के निशाने पर आ गए हैं . कुल मिला कर लाशों का देश बने सीरिया में तेजी से बदल रही है सामाजिक संरचना . इस देश में धीरे धीरे ईसाइयो और शियाओं का कब्ज़ा होता जा रहा है क्योकि सुन्नियो में अधिकतर ISIS के समर्थक होने के चलते देखे जा रहे आतंकी नजर से .

ध्यानद देने योग्य है की अमेरिका और रूस की इस जोर आजमाइश में अब तक सीरिया में करीब पाँच लाख लोग मारे गए हैं जिसमे अधिकतर सुन्नी मुसलमान हैं .. अमेरिका और रूस की सेनाओ के शक्ति प्रदर्शन में जो मौत से बच गए वो विदेशो में शरण ले रहे हैं । खुद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी समिति’ का कहना है की इस भयानक युद्ध के चलते अब तक दक्षिण-पश्चिमी सीरिया में हिंसा बढ़ने से 3,20,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं जबकि 7,50,000 अन्य लोगों पर हिंसा का शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है. सीरिया की सामाजिक संरचना में ज्यादातर लोग सुन्नी अरब मुसलमान हैं ..

इस समय वहां के रूस समर्थित शासक असद सीरिया के उत्तर और दक्षिण-पश्चिम में ज्यादातर सुन्नी विद्रोही क्षेत्रों को फिर से लेने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें और अधिक पुस किया जा सकता है। इस बीच, असद का राज्य अलौइट (उनके संप्रदाय) के रूप में अधिक सांप्रदायिक हो रहा है, शिया और ईसाई अल्पसंख्यक भागने वाले सुन्नी द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को लेना शुरू कर दिये हैं। यद्द्पि इसके लिए शिया मुस्लिमो के धैर्य को भी जिम्मेदार माना जाएगा क्योकि सुन्नी मुस्लिमों ने ज्यादातर अपराध और आतंकवाद की राह पकड़ी जिसके चलते वो पहले सीरिया की सरकार के निशाने पर रहे और अब अमेरिका और रूस जैसी महाशक्ति के निशाने पर आ गए हैं .. इसके चलते ही उन्हें खानाबदोश जीवन जीना पड़ा है और अब अपने देश को छोड़ कर भागना पड़ रहा है .. यद्द्पि वो जहाँ और जिस देश में शरण पा रहे हैं वहां भी वो ठीक वैसी ही हरकत कर रहे हैं जो सीरिया में करते थे जिसके चलते यूरोप में आतंकी घटनाओं की बाढ़ जैसी आ चुकी है . सिरिया के 80 फीसद सुन्नी मुसलमानों पर 10 से 20 प्रतिशत शिया मुसलमान हावी हैं यहां तक की उच्च अधिकारी ज़्यादातर शिया ही हैं क्योकि उन्होंने आतंक के बजाय पढ़ाया लिखाई और अपने आप को अधिकारी आदि बनाने पर ध्यान दिया था .

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