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इस सजा को सुनकर ही सहम जाएगी आपकी रुह, तो सोचिऐ सहने वाले इंसान पर क्या बीती होगी ?

आज के समय
में भी महिलाओें के उपर हो रहे अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहे है। ये समस्या
सिर्फ किसी शहर गांव या देश की ही नहीं है वरन पूरे विश्व की बात है। जहां पर
महिलाओं के उपर इस तरह के अत्याचार होते है कि हम सोच भी नहीं सकते है ऐसी ही एक
खबर हम आपको बताने जा रहे है जहां एक परिवार ने ही अपनी बेटी को एक टापू पर मरने
के लिए छोड़ दिया।

जी हां ये खबर है युगांडा की जहां पर अविवाहित लड़कियों के प्रेग्नेंट होने पर उन्हें मरने के लिए एक
वीराने टापू पर छोड़ देने का रिवाज़ था. इनमें से कुछ ही क़िस्मत वाली होती थीं
जिन्हें बचा लिया जाता था.

इन्हीं
बचाई गई लड़कियों में से एक हैं माउदा कितारागाबिर्वे जो 12 साल की उम्र में गर्भवती हुईं और उन्हें टापू पर छोड़ दिया गया. इस टापू
को अकाम्पीन या ‘पनिशमेंट लैंड’ कहा
जाता है.

माउदा
का कहना है कि जब  उनके परिवार वालो को
उनके प्रेग्नेंट होने के बारे में पता चला तो वो उनको नाव में बिठाकर अकाम्पीन ले
गए और वहां पर माउदा ने 4 रातें बिना कुछ खाए पीये गुजारी। और वहा पर बहुत
ठंड़ भी थी जिस वजह से माउदा को लगा कि उनका मरना तो तय ही है। लेकिन माउदा की
किस्मत अच्छी थी क्योकि उसे एक मछुआरा मिला जो कि माउदा को अपने घर ले गया। पहले
उन्हें संदेह हुआ, लेकिन मछुआरे ने उन्हें भरोसा दिलाया कि
वो उन्हें पत्नी की तरह रखेगा. वो इस ‘पनिशमेंट लैंड’
से सटे लेक बुनयोन्यी से नाव से 10 मिनट की
दूरी पर स्थित गांव काशुंग्येरा में रहती हैं.

माउदा
के पोते और टूर गाइड टाइसन नामवेसिगा ने उन्हें बताया कि मैं रुकिगा भाषा में बात
कर सकती हूं. उनके गिर चुके दांतों वाले चेहरे पर मुस्कान उभरी.

उस
समय उनकी उम्र 80 वर्ष
से अधिक होगी, लेकिन उनके परिवार का मानना है कि उनकी उम्र 106
वर्ष है.

 

 

आपको बता दें बैकिगा समाज  की मान्यताओं की मानें तो लड़की केवल शादी के
बाद ही प्रेग्नेंट हो सकती है। कुंवारी लड़की की शादी की एवज में मवेशियों के रुप
में दहेज मिलता है। और वो लड़किया जो कि विवाह से पहले ही गर्भवती हो जाती थी
परिवार के लिय सिर्फ शर्मिदगी का कारण मात्र ही होती थी। और तो और उनको उनके
आर्थिक फायदे के छिन जाने के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है। बस इसी वजह से इन
मासूम लड़कियों को टापू पर मरने के लिए  छोड़
दिया जाता है।

 

बता दें कि ये रिवाज 19वीं शताब्दी में मिशनरी और उपनिवेशवादियों के पहुंचने से पहले तक
लगातार चलता रहा और तब तक नहीं रुका जब तक की इसे गैरकानूनी घोषित नहीं कर दिया
गया।

उस
दौरान अधिकांश लड़कियां तैरना नहीं जानती थीं. इसलिए ऐसी लड़कियों के सामने दो
रास्ते बचते थे, एक तो
पानी कूद कर मर जाएं या ठंड और भूख से मर जाएं. माउदा बताती हैं, “उस समय मैं 12 साल की रही होऊंगी, झील के बीचोबीच किसी टापू पर अकेले छोड़ दिए जाने से किसी को भी डर
लगेगा.”

ये
घटनाऐ सिर्फ युगांडा तक ही सीमित नहीं थी बल्कि दूसरे हिस्सों में भी लड़कियों के
साथ ऐसा जुल्म जारी था। आपको बता दें कि युगांड़ा के दूसरे हिस्से जो कि आज का
रुकुंगिरी जिला है वहां पर ऐसी लड़कियों को किसीजी़ फॉल्स से नीचे फेंक दिया जाता
था। और यहां से नीचे गिरने के बाद कोई जिन्दा भी नहीं बच पाता था। इस टापू से
लड़कियों के साथ शादी करने का मतलब था दहेज़ मुक्त पत्नी पाना जब माउदा मछुआरे साथ
गांव पहुंचीं तो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं. इनके पास दशकों से पर्यटक आते
रहे है। लेकिन माउदा की जिन्दगी का सबसे दुखद हिस्सा वो है जब मारपीट के दौरान
गर्भ गिर गया।

माउदा ने बताया कि उनकी तीन बेटियां है और वो अपनी बेटियों के साथ
अपने जैसा र्बताव नहीं होने देंगी। इन लड़कियों को सजा देना यहां पर ओकुहीना कहलाता
है और इसी वजह से इस टापू का नाम अकाम्पीन पड़ा।

माउदा
बताती हैं जिस शख़्स ने उन्हें इस रास्ते पर डाला उसे दोबारा कभी नहीं देखा गया और
कई सालों बाद उन्होंने उसकी मौत की ख़बर सुनी.

उनके
पति की 2001 मौत
हो गई. उनके बारे में वो कहती हैं, “वो मुझे प्यार करता
था. उसने वाक़ई मेरी देखभाल की.”

माउदा ने आगें बताया कि हमारे छह बच्चे हुए और ये भी बताया कि उनके पति
आखिरी सांस तक उनके ही साथ थे। वो आगे बताती है कि इसमें काफी समय लगा पर उनका
अपने घर वालों से मेल- मिलाप हो गया।

माउदा आगे बताती है कि ईसाई बनने के बाद
उन्होने अपने सभी गुनाहगारों को माफ कर दिया यहां तक की अपने उस भाई को भी जो
माउदा को उस टापू तक छोड़ने गया था और उन्होने बताया कि वो अपने परिवार से मिलने भी
जाऐंगी। ये भी माना जाता है कि माउदा उस टापू पर छोड़ी जाने वाली आखिरी लड़की थी।

क्योंकि
ईसाइयत आने के बाद ये रिवाज़ कम हो गया और कड़े क़ानूनों के बाद इस पर पाबंदी लग
गई.

ल्ेकिन
आज के इस दौर में  भी अविवाहित प्रेग्नटें
महिलाओं को बुरी नजर से ही देखा जाता है।

 

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