मायावती पर सुप्रीम वार.. CJI ने दिया आदेश- मूर्तियां बनाने पर खर्च हुए पैसे को लौटाएं मायावती.. अब क्या करेंगे अखिलेश?


बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख तथा उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को सुप्रीम कोर्ट ने करारा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक जन हित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि मायावती ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अपनी तथा हाथियों की मूर्तियां बनवाने में जनता का जो पैसा खर्च किया है, उस पैसे को वापस किया जाए. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला जहाँ बीएसपी सुप्रीमो मायावती के करारा झटका है तो इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी असहज स्थिति में आ गये हैं.

आपको बता दें कि मायावती के द्वारा उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण करवाया गया. इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं. ये मुद्दा इससे पहले भी चुनावों में उठता रहता है और विपक्षी इस मुद्दे पर निशाना साधते हैं. बसपा शासनकाल में ये पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य शहरों में बनवाए गए थे. उस दौरान समाजवादी पार्टी ने मायावती   पर सवाल खड़े किये थे तथा उन पर जनता के पैसों को बर्बाद करने का आरोप लगाया था. अखिलेश सरकार में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों पर कुल 5,919 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन पार्कों और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी बहाल किए गए थे. ऐसे में अब जब अखिलेश मायावती के साथ हैं तब उनसे भी ये सवाल जरूर पूंछा जाएगा कि अब वह मायावती का समर्थन करेंगे या फिर पहले की तरह ही मायावती को कटघरे में खड़ा करेंगे.

साल 2009 में रविकांत व अन्य ने स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण के खिलाफ याचिका लगाई थी. इस याचिका को खारिज करने के लिए मायावती की तरफ से याचिका लगाई गई थी, जिस पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने मायावती के वकील से कहा, ‘अपने क्लाइंट को बता दीजिए कि उन्हें हाथियों और मूर्तियों पर खर्च जनता के पैसों को सरकारी खजाने में वापस करना चाहिए.’ मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मूर्तियों, स्मारक और पार्कों पर खर्च हुए पब्लिक मनी को मायावतीको सरकारी कोष में लौटना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी.


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