मुसलमानों के हथियार उठाने की अपील के बाद पहली बार आक्रोशित हुए हिन्दू साधू संत.. अयोध्या से मिला जवाब

शायद ये पहली बार है जब हिन्दू धर्मगुरु ने हिंदुत्व के लिए इस तरह से आवाज को बुलंद किया है. ये अक्सर देखा जाता है कि तमाम इस्लामिक मौलाना मौलवी आये दिन विभिन्न विषयों को लकर बेहद ही आपत्तिजनक तथा भड़काऊ बयान देते रहते हैं. इसे लेकर तमाम हिंदूवादी कार्यकर्ता हिन्दू धर्म गुरुओं से इस बात को लेकर अपनी नाराजगी जताते हैं कि हमारे धर्म गुरु विधर्मी ताकतों के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते तथा धर्म रक्षा के लिए आगे नहीं आते. लेकिन अब श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से एक संत ने इस्लामिक चरमपंथी बयानबाजी के खिलाफ आवाज उठाई है.
ज्ञात हो कि हाल ही में शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने अपने एक बयान में सरकार से अल्पसंख्यकों को मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ हथियारों का लाइसेंस देने की वकालत की थी. कल्बे जव्वाद ने कहा था कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार खरीदने चाहिए वहीं उनके साथ बैठे हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा ने कहा था कि मुस्लिमों को चाहे अपना कीमती सामान क्यों न बेचना पड़े लेकिन वह हथियार खरीदें.
इस्लामिक शिया मौलाना कल्बे जव्वाद के इसी बयान अब हिन्दू संत समाज विफर गया है. संत समाज ने इसे देश-विरोध मानसिकता करार दिया है और कहा है कि किसी एक व्यक्ति की गलती से पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा करना देश विरोधी है, तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास का इस मुद्दे पर कहना है कि गोधरा के बाद किसी भी हिंदू संगठन ने नहीं कहा कि सभी हिंदू हथियार रखें, क्योंकि देश में अखंडता और एकता की जरुरत है, कुछ लोग हिंदुस्तान का माहौल खराब करना चाहते हैं।”
महंत परमहंस दास ने कहा कि ‘इस तरह का बयान देने वाले देश को संघर्ष की आग में जलाना चाहते हैं। कुछ लोगों की गलती की वजह से सभी को दोषी नहीं कहा जा सकता। देश को फिर बांटने की तैयारी की जा रही है। इसे कामयाब नहीं होने देंगे।’
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