सरदारों के नरसंहार में जिस जज ने दी थी कमलनाथ को क्लीन चिट, उसको दिया गया था ये बड़ा पद… पद देने वाली पार्टी भाजपा नहीं

जिस दिन कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिख दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुना दी. सज्जन कुमार को सजा सुनाने के बाद कमलनाथ भी ट्रेंड करने लगे तथा सिख संगठनों ने भी इनके मुख्यमंत्री बनने का विरोध किया है. कारण, सिख दंगों में सज्जन कुमार के साथ कमलनाथ भी दोषी हैं लेकिन बाद में दंगों की जांच के लिय बने आयोग द्वारा कमलनाथ का नाम दंगों से हटा दिया गया था

सवाल ये भी है कि आखिर कमलनाथ का दंगों से किसने और क्यों हटाया? सिख दंगों में कमलनाथ के रोल को समझने के लिए हमें तीन दशक पहले 1984 में जाना होगा. कमलनाथ को बेटा बताने वाली देश की तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके बॉडीगार्ड(सिख) ने प्रधानमंत्री आवास पर ही गोलियों से भून डाला था. इसके बाद पूरे दिल्ली में सिखों के खिलाफ दंगे शुरू हो गए थे. ये दंगे बड़े पैमाने पर हुए और निर्दोष लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया गया. कांग्रेस पार्टी के कई नेता इन दंगों में लोगों को भड़का रहे थे जिससे मौत का आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था.

कमलनाथ पर आरोप है कि दिल्ली स्थित रकाबगंज गुरुद्वारे के पास जब दो सिखों को जिन्दा जला दिया गया, उस वक्त वो घटना स्थल पर ही मौजूद थे और भीड़ को भड़काने का काम कर रहे थे. भाजपा नेता ताजिंदर बग्गा की मानें तो कमलनाथ ने रकाबगंज गुरूद्वारे में भी आग लगाई थी. लेकिन एसआईटी, रंगनाथ मिश्रा कमीशन और नानावटी आयोग के जांच के दौरान कमलनाथ के खिलाफ इन आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला. रंगनाथ मिश्रा कमीशन ने कमलनाथ के खिलाफ किसी भी सबूत के होने से इंकार कर दिया तथा उनका नाम दंगों से हटा दिया था. जिन रंगनाथ मिश्रा के कमीशन ने कमलनाथ को क्लीन चिट दी थी उन्हीं रंगनाथ मिश्रा को कांग्रेस ने राज्यसभा से सांसद बनाया. रंगनाथ मिश्रा 1998-2004 तक कांग्रेस से राज्यसभा में सांसद रहे.

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