एक दामिनी का बलात्कारी जो 3 साल बाद सिलाई मशीन के साथ रिहा हुआ, पर एक है बुलु विश्वास जो 14 साल जेल काट कर घोषित हुआ नाबालिग

जहाँ एक तरफ निर्भया के बलात्कारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने हाथ खड़े कर लिए और उसको किसी भी हाल में जेल भेज पाना संविधान की मजबूरी बता कर असम्भव बता दिया वहीँ दूसरी तरफ ये एक ऐसा मामला है जो किसी के लिए भी कई दिनों तक सोचने का विषय बन सकता है .. किसी अपराधी की उम्र 18 से कम होने पर उसका अपराध कम हो जाता हैं या फिर पीड़ित का दर्द कम हो जाता हैं. निर्भया कांड जिसे याद कर इंसान की रूह तक काँप जाती है ऐसे घिनोने अपराध का अपराधी जो 18 साल का होने से सिर्फ कुछ महीने कम था, तो उसे केवल 3 साल तक सुधार ग्रह में रखने के बाद छोड़ दिया गया.

ऐसा ही एक हत्या का मामला न्यायगढ जिले से सामने आया, जहाँ तीन भाइयों ने मिलकर हत्या को अंजाम दिया था. जिसमे से एक भाई 17 साल 3 महीने का था जब उसने 2003 में हत्या जैसे अपराध को अंजाम दिया. जब 14 साल बाद यह पता चला की सजा काटने वाला युवक हत्या करने के वक्त 18 साल से कम था तो पुलिस को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा हैं क्योंकि अपराधी की उम्र पुलिस रिकॉर्ड में 22 लिखी थी. नयागढ़ ज़िले के भूतडीही गांव के बुलु बिश्वाल की उम्र 17 साल और तीन महीने थी जब स्थानीय पुलिस ने उन्हें 20 जुलाई, 2003 में हुए हत्या के एक मामले में पांच अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया.
इसे पुलिस की बहुत बड़ी भूल बताया जा रहा हैं क्योंकि पुलिस की इसी गलती की वजह से एक 18 साल में 8 महीने कम उम्र वाले अपराधी को अपने अपराधों की सजा काटनी पड़ रही हैं. अपराधी 18 साल से कम था इसलिए उसका अपराध भी कम हैं और वह पूरी तरह से अपराधी नहीं है. किसी निर्दोष की हत्या की गयी जिसकी वजह से उसके परिवार वाले सदमे में रहे वो बड़ी बात नहीं हैं लेकिन अपराधी उस वक्त 18 साल का नहीं था इसलिए वो पुलिस की लापरवाही का पीड़ित हैं. क्या उम्र किसी का जुर्म कम कर सकती हैं? क्या कम उम्र का अपराधी, अपराधी नहीं हैं?
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