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गरीब और पिछड़े कहे जाने वाले मुस्लिमों की बकरीद में बिक रहे हैं ढाई करोड़ तक के बकरे


12 अगस्त को इस्लामिक लोग बकरीद मनाएंगे. इस दिन भेड़-बकरियों की कुर्बानी दी जायेगी. इसके लिए मुस्लिम लोग अभी से बकरों की खरीददारी में जुट गये हैं. लेकिन यहां जो एक बात सामने आ रही है वो काफी हैरान करने वाली है. देश में कथित सेक्यूलर राजनेता तथा बुद्धिजीवी अक्सर कहते हैं कि मुस्लिम लोग काफी पिछड़े हुए हैं, गरीब हैं. लेकिन बकरीद के लिए खरीदे जा रहे बकरों में इस गरीबी तथा पिछड़ेपन के खोखलापन को उजागर करने के लिए काफी है.

खबर के मुताबिक़, बकरीद के लिए मुस्लिम लोग हजारों या लाखों नहीं बल्कि करोड़ों की कीमत वाले बकरे खरीद रहे हैं, जो गरीबी की निशानी तो कतई नहीं कहा जा सकता. भोपाल में ‘किंग ऑफ इंडिया 2019’ नामक 171 किलो के एक बकरे को 8.5 लाख रुपये में बेचा गया है. बताया जा रहा है कि यह भारत का सबसे वजनी 171 किलो का है, इसलिए उसको किंग ऑफ इंडिया 2019 का नाम दिया. वजन के कारण लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज कराने का भी प्रस्ताव भेजा है.

देहरादून के आइएसबीटी से कुछ दूरी पर स्थित आजादनगर में आमिर हसन के घर एक खास बकरे को देखने के लिए इन दिनों भारी भीड़ जुट रही है. इसकी वजह बकरे की कीमत है, आमिर हसन ने इसकी कीमत ढाई करोड़ रुपये लगाई है. बकरे की उम्र करीब ढाई साल है. इसके अलावा देहरादून की ही मंडी में इन दिनों अल्लाहरक्खा बकरा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इसे खरीदने कई लोग आ चुके हैं और दो लाख रुपये तक कीमत लगा चुके हैं. इसका वजन 95 किलो है और यह रोजाना 2 किलो दूध, आधा किलो चने की दाल और 4 अंडो के साथ चारा खाता है.

वारणसी के बाजार में तोतापरी नस्ल के बकरे 90 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं. यहां देसी बकरे की कीमत चार हजार से 30 हजार रुपये तक हैं. भेड़ 10 हजार से 35 हजार के बीच बिक रहे हैं. कई मंडियों में ‘शाहरुख़’ और ‘सलमान’ नामक बकरों की कीमत डेढ़ लाख रुपये लगी है. जबकि बगदादी की कीमत 1.25 लाख रुपये रखी गई है. इसके अलावा, कपाली का सुल्तान 75 हजार में और मानगो का आमिर नामक बकरा 65 हजार में बेचा जा रहा है.


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