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चरित्रहीन है राजेश तलवात तलवार – पूर्व अधिकारी.. एक बार फिर जिंदा हुआ आरुषी का मामला

आरुषि, हेमराज हत्याकाण्ड भारत का सबसे जघन्य व रहस्यमय हत्याकाण्ड था जो 15–16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 (जलवायु विहार) में हुआ। पेशे से चिकित्सक दम्पति की एकमात्र सन्तान आरुषि (आयु: 14 वर्ष) तथा घरेलू नौकर हेमराज (आयु: 45 साल) की नृशंस हत्या का आज तक भारत की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी सीबीआई भी पता नहीं सकी। जिसके बाद से पूरा देश अब सीबीआई को संदेह की नजर से देखता है। आरुषि और हेमराज के कातिलों का भारत की पुलिस एजेंसी हत्या के 9 साल भी पता नहीं लगा सकीय है।

आरुषि के पिता डॉक्टर राजेश तलवार और मां डॉक्टर नूपुर तलवार नवंबर 2013 से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद थे। आरुषि हत्याकांड में विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोनों को सजा सुनाई थी लेकिन हाई कोर्ट ने सीबीआई अदालत का फैसला पलट दिया और दोनों को 2017 में बरी कर दिया है। इस हत्याकांड के 9 साल बाद भी आरोपी जेल से बाहर है। आरुषि और हेमराज की हत्या अपने पीछे कई राज छोड़ गयी है।  

1. किताब के मुताबिक़, सीबीआई ने घटनास्थल पर जो नमूने इकट्ठा किए और प्रयोगशाला भेजे, उनके साथ कथित तौर पर छेड़खानी की गई।   
किताब में सेन ने दावा किया है कि घटनास्थल पर रखे सामान के साथ छेड़-छाड़ की गयी है उन्होंने यह भी कहा है कि हैदराबाद की सेंटर फ़ॉर डीएनए फ़िंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नॉस्टिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया था कि हेमराज का खून तलवार दंपति के घर से कुछ दूर स्थित कृष्णा के बिस्तर पर मिला, लेकिन जांचकर्ताओं ने इसका संज्ञान नहीं लिया। .
2. पत्रकार अविरुक के मुताबिक़, अगर रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा गया होता तो तलवार दंपति के उस कथन को मज़बूती मिलती कि घर में कोई बाहरी व्यक्ति दाखिल हुआ।
अविरुक कहते हैं कि सीबीआई के एक अफ़सर धनकर ने 2008 में प्रयोगशाला को पत्र लिखकर कहा कि हेमराज का तकिया और उसका खोल, जिस पर खून लगा था, वो आरुषि के कमरे से मिले थे.उधर सीबीआई ने इसके उलट सुप्रीम कोर्ट के सामने, इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने, अपनी क्लोज़र रिपोर्ट में भी ये कहा कि ये सामान हेमराज के कमरे से मिला.लेकिन मुक़दमे के दौरान सीबीआई की अदालत में दिए गए बयान को नज़रअंदाज़ करते हुए सीबीआई अफ़सर धनकर की ‘ग़लत’ चिट्ठी पर भरोसा दिखाया गया।
3.किताब के मुताबिक़, सीबीआई का कहना था कि आरुषि की हत्या राजेश तलवार ने एक गोल्फ़ स्टिक से की जिसे कथित तौर पर बाद में अच्छे से साफ़ किया गया, लेकिन मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने एक दूसरी गोल्फ़ स्टिक को पेश किया।
सवालों के बीच एक अहम सवाल ये भी था कि आखिर तलवार दम्पति अभियोजन पक्ष मुकदमे के दौरान दो गोल्फ़ स्टिक कैसे पेश कर सकता है. अविरुक के अनुसार, सरकारी वकील की ओर से दलील दी गई कि आरुषि का गला स्कैल्पल या डेंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली छुरी से काटा गया. जांच का विषय यह भी था कि क्या वाकई एक स्कैल्पल से हत्या की जा सकती है ?
4. किताब के अनुसार, तलवार दंपति से संपर्क के लिए, उन्हें दफ़्तर बुलाने के लिए, जानकारी हासिल करने के लिए सीबीआई द्वारा hemraj.jalvayuvihar@gmail.com आईडी का इस्तेमाल करना केस को लेकर शुरुआत से ही अफ़सरों की सोच पर सवाल खड़े करता है।
पत्रकार सेन का कहना है कि इसी ईमेल के इस्तेमाल से सभी जानकारी प्रदान की गयी जो की गलत है, सरकारी ईमेल का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ।
 5. किताब के मुताबिक़, तलवार दंपति के घर में काम करने वाली भारती मंडल का बयान भी कई सवाल खड़े करता है. दस्तावेज़ों के मुताबिक़, भारती ने अदालत में कहा कि उन्हें जो समझाया गया वो वही बयान दे रही हैं।
कामवाली भारती ने जो बयान दिया वो अपने आप में ही एक पहली थी क्योंकि पहले उन्होंने कहा के उन्होंने दरवाजे को हाथ लगाया था लेकिन बाद में बोली सिर्फ बेल बजाई थी, सवाल ये है कि अगर घर अंदर से बंद था तो तलवार दंपत्ति के सिवा घर में कोई और नहीं था।
6. अगर आरुषि ने दरवाज़ा नहीं खोला तो क्या आरुषि के कमरे में मुख्य दरवाज़े के अलावा किसी और दरवाज़े से भी दाखिल हुआ जा सकता था?
किताब के अनुसार, आरुषि के कमरे में दाखिल होने का एक और रास्ता हो सकता था जिस पर जांचकर्ताओं को ध्यान देना चाहिए था.आरुषि के कमरे से पहले एक गेस्ट टॉयलेट पड़ता है जो कि आरुषि के टॉयलेट की ओर खुलता था.दोनों टॉयलेट के बीच में एक दरवाज़ा था जिसे गेस्ट टॉयलेट की ओर से खोला जा सकता था।

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