88 विद्रोही एक साथ डालेंगे हथियार.. बोले- “क्या करें, ये है मोदी सरकार”

हिंदुस्तान की एकता तथा अखंडता के लिए एक के बाद एक कड़े उठा रही केंद्र की मोदी सरकार को एक और बड़ी सफलता मिली है. एकतरफ मोदी सरकार ने कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद उसे पूरी तरह से भारत में मिला लिया है तथा अब कश्मीर का देश के संबंध देश के अन्य राज्यों की तरह ही हो गया है तो वहीं पूर्वोत्तर भारत में एक साथ 88 विद्रोही हथियार डालने को तैयार हो गये हैं. इन विद्रोहियों का कहना है कि ये मोदी सरकार है तो लड़ने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि देश अच्छी दिशा में जा रहा है.

खबर के मुताबिक़, पूर्वोत्तर के बीजेपी शासित राज्य त्रिपुरा के उग्रवादी संगठन नेशनल लिब्रेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा के 88 सदस्य आज 13 अगस्त को सरकार के सामने आत्म समर्पण कर रहे हैं. इस संगठन की शुरूआत 30 साल पहले हुई थी तथा समय—समय पर उग्रवादी गतिविधियों को संचालित करता रहता था. लेकिन अब यह संगठन भारत सरकार के साथ शांति की समझौता करने जा रहा है. इसके तहत इस संगठन के 88 सदस्य एक साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं.

जानकारी मिली है कि त्रिपुरा के उग्रवादी संगठन नेशनल लिब्रेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा NLFT (SD) ने अब उग्रवाद का रास्ता छोड़कर शांति के रास्ते पर चलने का निर्णय किया. इसके तहत अब इस उग्रवादी संगठन के सभी सदस्य अपने हथियारों समेत सरेंडर करने के साथ ही भारतीय संविधान को मानकर चलेंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों के विकास के लिए आर्थिक विकास करने की बात कही गई है.

इसके लिए संगठन के लोगों ने केंद्र सरकार के साथ समझौता पत्र पर हताक्षर कर दिए हैं तथा कहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए अब वह संविधान के रास्ते पर चलेंगे. संगठन के साथ गृह मंत्रालय के ज्वॉइंट सेक्रेटरी सत्येंद्र गर्ग, अतिरिक्त चीफ सेक्रेटरी कुमार आलोक, त्रिपुरा सरकार के साथ NLFT (SD) की तरफ से सबीर कुमार देबबर्मा तथा काजल देबबर्मा ने सेटलमेंट मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके बाद इस संगठन के सदस्यों को केंद्रिय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली भी बुलाया है. NLFT के हथियार डालने तथा संविधान के रास्ते पर चलने को मोदी सरकार की बड़ी जीत माना जा रहा है.


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