केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब किसी भी जाति को जोड़ने के लिए संसद की मंजूरी जरुरी

नई दिल्ली : मोदी सरकार की कैबिनेट ने बड़ा फैसला किया है। जाट आरक्षण की मांग को देखते हुए मोदी कैबिनेट ने गुरुवार को एक बड़े फैसले के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह नए आयोग बनाने का निर्णय लिया है।

केंद्र सरकार के अनुसार सामाजिक शैक्षिक तौर पर पिछड़ों की नई परिभाषा होगी। नए नियम के अनुसार अब संसद की मंजूरी के बाद ही ओबीसी सूची में बदलाव किया जा सकेगा। बता दें कि ओबीसी कल्याण से जुड़ी संसदीय समिति ने सरकार से ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग की थी।

सोमवार को समिति के 18 सदस्य अध्यक्ष गणेश सिंह की अगुवाई में प्रधानमंत्री मोदी से मिले। सतना से बीजेपी सांसद गणेश सिंह के साथ साक्षी महाराज, प्रीतम गोपीनाथ मुंडे और राजीव सातव समेत समिति के कई अहम सदस्य मौजूद थे।

वहीं, इसके लिए सरकार एक कमेटी का गठन करेगी जो नए आयोग की दशा और दिशा को लेकर छह महीने के अंदर सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में जाटों के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के बारे जिक्र होगा। इसके साथ ही सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट के बाद ही जाटों को पुख्ता तौर पर आरक्षण दिया जाएगा।     

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