संसद में पास होने जा रहा वो बिल जो भारत भूमि के बांग्लादेशी और रोहिंग्या के बोझ को करेगा कम


अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही सत्र में तीन तलाक तथा 370 को ख़त्म करने जैसे अहम् बिलों को पास कराने के बाद मोदी सरकार शीतकालीन सत्र में उस बिल को पास कराने की तैयारी में है जो भारत भूमि से बांग्लादेशी तथा रोहिंग्या उन्मादियों की भीड़ को कम करेगा. हम बात कर रहे हैं नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जिस पर हर हाल में संसद की मुहर लगाने के लिए मोदी सरकार ने अभी से कमर कस ली है. बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवम्बर से 13 दिसंबर तक चलेगा.

सरकार के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस बिल की राह में राज्य सभा में संख्या बल की कमी को दूर करने की अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है. हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही पार्टी राजग के इतर दलों टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस से सीधा संपर्क साधेगी. सरकार को उम्मीद है कि ये दोनों पार्टियाँ सदन में नागरिकता संशोधन विधेयक बिल पास कराने में  बिल के समर्थन में वोट करेंगी.

बता दें कि असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर NRC  का काम पूरा होते ही भाजपा पूर्वोत्तर के राज्यों में उलझ गई है. बड़ी संख्या में हिंदुओं के NRC के दायरे से बाहर होने के कारण सरकार के सामने इस बिल को कानूनी जामा पहनाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों मसलन हिंदू, सिख, इसाई, बौद्ध, जैन समुदाय के लोगों को मामूली शर्तों पर भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. राज्यसभा में जरूरी संख्याबल न होने के कारण सरकार इस बिल को अब तक पास नहीं करा सकी है.

मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक अगर टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर (कुल 15 सदस्य) का साथ मिल जाए तो उच्च सदन में बहुमत के रोड़े को हटाया जा सकता है. इन दलों को बिल को लेकर कोई बड़ी आपत्ति नहीं है. ऐसे में फैसला किया गया है कि विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही इन दलों के नेताओं से संपर्क साध कर इन्हें बिल के समर्थन के लिए राजी किया जाए. नाराज सहयोगी जदयू, एजीपी, बीपीएफ, एनपीएफ और एसडीएफ को भी मनाया जाए.

सरकार के सूत्रों ने ये भी बताया है कि अगर ये दल नहीं मानते तो बहुमत हासिल करने केलिए इन्हें उच्च सदन में मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए मनाया जाएगा. वैसे बहुमत के अभाव के बावजूद तीन तलाक बिल और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले पर राज्यसभा की मुहर लगाने में कामयाब होने के बाद सरकार नागरिकता बिल को भी पारित होने को लेकर पूरी आश्वस्त है.


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