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1993 मुंबई ब्लास्ट में सैकड़ों निर्दोषों के हत्यारे दरिन्दे अब्दुल गनी तुर्क की नागपुर जेल में मौत. दरिंदगी से भरा था तुर्क का जीवन

अदालत और संविधान के न्याय से पहले ही आखिरकार दरिंदगी से भरे जीवन वाले मुंबई में सैकड़ो लोगों के हत्यारे अब्दुल गनी तुर्क ने अपनी आँखें सदा सदा के लिए मूँद ली .. इसी के साथ भारत के तमाम लोगों का इन दरिन्दे को फांसी के फंदे पर लटकते देखने का सपना अधूरा रह गया जिसने मजहबी उन्माद में कई लोगों को मार डाला था .बता दें कि इस विनाश लीला में दाऊद इब्राहिम, याकूब मेमन और उसके भाई टाइगर मेमन ने मुख्‍य किरदार निभाए थे।

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विदित हो कि मुंबई में १९९३ के ब्लास्ट के मुख्य अभियुक्तों में से एक और भारत के सबसे बड़े गद्दार दाऊद इब्राहीम के साथी अब्दुल गनी तुर्क के नागपुर जेल में मौत की खबरें आ रही हैं . तुर्क पर 12 मार्च 1993 के दिन हुए इस हमले में सेंचुरी बाजार में आरडीएक्स प्लांट करने का दोषी पाया गया था। इस हमले में 113 लोगों की मौत और 227 लोग घायल हुए थे। तुर्क इस मामले में दोषी पाए जाने वाला आठवें व्यक्ति था। टाइगर मेमन अभी तक फरार हैं, जबकि याकूब मेमन को साल 2015 में फांसी दे दी गई थी

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तबीयत खराब होने के चलते उसे अस्‍पताल में भर्ती करवाया गया था। तुर्क को टाडा अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे उम्र कैद में तब्‍दील कर दिया था.. टैक्‍सी ड्राइवर अब्‍दुल गनी तुर्क को सेन्‍चुरी बाजार के मैनहोल के नीचे आरडीएक्‍स लगाने का दोषी पाया गया था। इस मैनहोल के ऊपर से एक बस के गुजरने से जबरदस्‍त विस्‍फोट हुआ था जिसमें 113 लोग मारे गए थे और 227 लोग घायल हुए थे।

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