INX मीडिया घोटाला: पी. चिदंबरम ही नहीं उनका बेटा कार्ति चिदंबरम भी आयेगा इसी घेरे में.. बहुत गहरी हैं घोटाले की परतें


कांग्रेस नेता तथा देश के पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के भ्रष्टाचार के पापों का घड़ा फूट गया है तथा सीबीआई द्वारा द्वारा संभावित गिरफ्तारी के डर से पी. चिदंबरम घर छोडकर भाग गये हैं. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग पी. चिदंबरम को भगोड़ा कह रहे हैं. सबका एक ही सवाल है है विजय माल्या, नीरव मोदी तथा मेहुल चौकसी के भागने को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने वाले कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम अब खुद क्यों भाग रहे हैं? आखिर चिदंबरम को सीबीआई से डर क्यों लग रहा है?

पी. चिदंबरम को मंगलवार के दिन दो झटके लगे. सबसे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर तुरंत सुनवाई से मना करते हुए बुधवार को याचिका दाखिल करने को कह दिया. CBI और ईडी ED दोनों एजेंसियां कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम के पीछे लगी हैं. उनके जोर बाग के पॉश इलाके के घर में दोनों एजेंसियां दबिश दे रही हैं. उनके खिलाफ मई 2017 से चल रहा केस अब अहम मोड़ पर आ चुका है. जहां सीबीआई और ईडी के पास उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बहुत कुछ है.

आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में मुख्य साजिशकर्ता माना है. पी चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए कंपनी को एफडीआई क्लीयरेंस दी गई थी. पी चिदंबरम का इस आरोप से पीछा छुड़ाना आसान नहीं रह गया है. सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान कहा है कि आईएनएक्स मीडिया ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की सेवाएं ली थीं. कार्ति चिदंबरम ने फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) का अप्रूवल पाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया था.

इस साजिश में कुछ ब्यूरोक्रैट्स, कंपनी के प्रमोटर पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी भी शामिल रहे हैं. इस मामले में सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (CVC) ने वित्त मंत्रालय में रहे चार ब्यूरोक्रैट्स के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है. इसमें सिंधुश्री खुल्लर, अनूप पुजारी, प्रबोध सक्सेना और रबिन्द्र प्रसाद का नाम शामिल है. सीवीसी के मुताबिक इनलोगों ने साजिश में अहम रोल प्ले किया है.

 एफडीआई घोटाले की काली परतें–

एफआईपीबी की 18 मई 2007 को हुई बोर्ड मीटिंग में आईएनएक्स मीडिया के आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में निवेश को मंजूरी नहीं दी थी. आरोप है कि इसके बाद एफआईपीबी के अप्रूवल को मैन्यूपुलेट किया गया. आईएनएक्स मीडिया ने आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में 305 करोड़ का निवेश किया, जबकि इसके लिए एफआईपीबी का अप्रूवल नहीं था. इसके महीनों बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हरकत में आई. एफआईपीबी, जो वित्त मंत्रालय के अधीन है, से इस बारे में जवाब तलब किया गया. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने निवेश के बारे में और एफडीआई को किस आधार पर मंजूरी दी गई, इस बारे में जानकारी मांगी.

]इसके बाद एफपीआईबी ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से दबाव बढ़ने पर आईएनएक्स मीडिया से इस बारे में जवाब तलब किया, जिसके बाद आईएनएक्स मीडिया ने पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की सेवाएं लीं. सीबीआई का आरोप है कि मामले को सुलझाने के लिए पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने तत्कालीन वित्त मंत्री तथा अपने पिता पी चिदंबरम के साथ अपने रिश्तों का गलत इस्तेमाल किया. सीबीआई का कहना है कि कार्ति चिदंबरम ने एफआईपीबी के कुछ ब्यूरोक्रैट्स की मदद ली.

सूत्रों के मुताबिक, कार्ति की कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की सलाह पर आईएनएक्स मीडिया ने 26 जून 2008 को इस बारे में सफाई दी. कंपनी का कहना था कि निवेश शेयर में हुए मुनाफे की शक्ल में किया गया था. सीबीआई का आरोप है कि इसके बाद कार्ति चिदंबरम के प्रभाव की वजह से एफआईपीबी के अधिकारियों ने इस ओर से आंखें मूंद लिया. इतना ही नहीं एफआईपीबी के कुछ अधिकारियों ने आईएनएक्स मीडिया को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया.

इसके बाद एफआईपीबी ने INX न्यूज प्राइवेट लिमिटेड को फ्रेश अप्रूवल पाने के लिए फिर से अप्लाई करने को कहा. एफआईपीबी ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट की सलाह को भी अनदेखा कर दिया. रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने इस मामले की जांच की सिफारिश की थी और कहा था कि एफडीआई में नियमों की अनदेखी की गई है और एफआईपीबी के अप्रूवल के बिना निवेश हुआ है. फिलहाल इस मामले में पी. चिदंबरम फंस चुके हैं तो वहीं उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर भी शिकंजा कसने वाला है. पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद अब कार्ति चिदंबरम सीबीआई और ईडी की राडार पर हैं.


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