अलीगढ़ का वो मुस्लिम विश्वविद्यालय अब होगा सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर जिससे निकला मन्नान जैसा दुर्दांत आतंकी


भारत सरकार से तमाम सुविधाएं प्राप्त करके उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय(AMU) से शिक्षा ग्रहण की लेकिन उसके रग-रग में हिंदुस्तान के प्रति नफरत दौड़ रही थी. फिर उसने हथियार उठाया तथा इस्लामिक आतंकी दल हिजबुल में शामिल होकर शपथ ली भारतमाता के आंचल को लहूलुहान करने की, भारतीय सेना के जांबाज जवानों का क़त्ल कर्ण की. हम बात कर रहे हैं भारतीय सेना के जवानों के साथ मुठभेड़ में मारे गये AMU से निकले दुर्दांत आतंकी मन्नान वानी की.

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर और एएमयू के रिसर्च स्कॉलर मन्नान वानी के उत्तरी कश्मीर में सेना के हाथों मारे जाने के बाद देश की खुफिया एजेंसियों का फोकस एक बार फिर से एएमयू में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों पर हो गया है. एजेंसियां कश्मीरी छात्रों की गतिविधि के साथ-साथ उनके अचार व्यवहार पर भी खास नजर बनाए हुए हैं. यहां का पूरा इनपुट देश की आला एजेंसियों को भेजा जा रहा है. मन्नान वानी के एएमयू से लापता होने का प्रकरण इस वर्ष जनवरी महीने में सामने आया तो अलगाववादी गुटों से यहां का कनेक्शन सार्वजनिक हुआ.

खुफिया एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि यहां पर अगर कुछ छात्रों को छोड़ दें तो बाकी सभी छात्र शांति प्रिय और अध्ययन ही करने वाले हैं, लेकिन खुफिया एजेंसियां यहां विगत काल में हुई कुछ गतिविधियों को नजर अंदाज नहीं कर सकीं. इनमें से एक गतिविधि यहां पर सिमी की स्थापना की थी. मन्नान वानी प्रकरण के बाद यहां पर एक शिक्षक की भूमिका संदेह के घेरे में आयी थी जिस पर छात्रों को भटकाने का आरोप लगा. विश्वविद्यालय ने भी अपने स्तर से इस प्रकरण में जांच कमेटी का गठन किया. अब मन्नान को मार गिराने के बाद खुफिया एजेंसियां इसके प्रतिक्रिया स्वरूप होने वाले घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं.


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