भारत की औरतों पर दारुल उलूम का फतवा लगातार जारी . अब आया महिलाओं पर एक और जिसमे वो कहाँ जाएँ और कहाँ नहीं इसका है फरमान


भारत की सरकार जहाँ महिलाओ के अधिकारों और उनके उत्थान के लिए तमाम प्रयास कर रही है , भारत के तमाम सांस्कृतिक और महिलाओ के हित में कार्य करने वाले संगठन दिन रात इस प्रयास में हैं कि किस प्रकार से नारी का सम्मान और स्वाभिमान बचाते हुए उन्हें भारत में बराबरी का दर्जा दिलाया जाय . लेकिन भारत की एक इस्लामिक संस्था जो मुस्लिमों के मजहबी पढ़ाई के लिए जानी जाती है , वहां से आये दिन महिलाओं के खिलाफ आ रहे फतवे कई सवाल खड़े कर रहे हैं .

ज्ञात हो कि अभी हाल में ही भारत की मीडिया क्षेत्र में दस्तक देते हुए दारुल उलूम देवबंद से फतवा आया था कि महिला टी वी एंकर बुरका या स्कार्फ पहन कर खबरों को पढ़ा करने लेकिन सिर्फ खाप पंचायतों पर नजर गडाए तथाकथित सेकुलर और बुद्धिजीवी वर्ग ने इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी . इस से पहले भी महिलाओं को नाख़ून कटाने और ब्यूटी पार्लर में न जाने, आई ब्रो न बनवाने के फतवे आते रहे हैं लेकिन उस पर बुद्धिजीवी वर्ग की खामोश ने ऐसे फतवे देने वालों को एक प्रकार से मूक सहमति दे दी . हैरानी की बात ये है कि भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर पाकिस्तान परस्ती कर देने , वन्देमातरम न गाने और भारत माता की जय का तिरस्कार करने वालों ने भी अब आये इस फतवे को निजता में दखल मानने से तो दूर उस पर एक शब्द बोलने से भी मना कर दिया है .

अभी हाल ही में विवाह समारोह में पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ खाना खाने को नाजायज बताने के बाद अब दारुल उलूम ने एक अन्य नया फतवा जारी कर बारात में औरतों के शामिल होने को पूरी तरह से नाजायज करार दिया है। इतना ही नहीं, फतवे में नसीहत करते हुए कहा गया कि यदि महिलाएं बारात में शामिल होती हैं तो गुनाह में शामिल होंगी। देवबंद क्षेत्र के गांव फुलासी निवासी नजम गौड़ ने दारुल उलूम के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से लिखित में सवाल किया था कि आमतौर पर घर से निकाह के लिए जब दूल्हा निकलता है तो उसे बारात कहते हैं। कई जगह बारात में ढोल-बाजे भी बजाए जाते हैं और दूल्हे को घोड़े पर बैठाकर बारात निकाली जाती है, जिसमें मर्दों के साथ-साथ परिवार और रिश्तेदारों समेत जान-पहचान की महिलाएं भी शामिल होती हैं। ऐसी बारात में गैर मर्द भी होते हैं, जिसमें महिलाओं की बेपर्दगी होती है।


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