निकाह में डोली रस्म के समय अपने मामा से दूर रहें दुल्हनें.. आ सकता है उनके मन मे सेक्स का विचार – दारुल उलूम देवबंद

एक बार फिर से चर्चा में है देवबंद ..ये वही इस्लामिक संस्था है जो आये दिन अपने फतवो के लिए दुनिया के कोने कोने में जानी जाती है ..भारत की तथाकथित सेकुलर मीडिया के खास वर्ग को इसके कठोर से कठोर फतवो में भी धर्मनिरपेक्षता की आहट मिलती है ..अभी हाल में ही महिलाएं कितना नाखून उगाएं, उसमें नेल पॉलिश लगाएं या नहीं..लेकिन अब जो फतवा आया है वो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाला और रिश्तों में अजीब दूरी पैदा करने वाला है ..

दारुल उलूम एक बार फिर से अपने फतवे को लेकर सुर्खियों में है. दारुल उलूम ने फतवे में कहा है कि मामा द्वारा दुल्हन को गोद में उठाकर गाड़ी या डोली में बिठाने की रस्म को खत्म कर देना चाहिए. दारुल उलूम के मुताबिक ये प्रथा गैर इस्लामिक है. दारुल उलूम ने एक और फतवा जारी किया है. मुस्लिम समुदाय में शादी की तारीख भेजने के लिए ‘लाल खत’ की रस्म को गलत बताया है. मुफ्तियों का कहना है कि ये रस्म गैर मुस्लिमों से आई है इसलिए इस रस्म को करना और इसमें शामिल होना जायज नहीं है. दारुल उलूम ने ऐसे जेवरों को भी पहनने के लिए मना किया है जिस पर कोई इमेज बना हो. स फतवे पर दलील है कि इस रस्म से दोनों में से किसी के भी मन में काम-वासना आ जाती है. बेंच ने लोगों को सलाह दी है कि बेहतर होगा कि दुल्हन डोली की तरफ चलकर जाए या उसकी मां उसे ले ।। कोई भी शख्स अपनी बड़ी हो चुकी भांजी को गोद में नहीं उठा सकता, ये मुस्लिम कानून की निगाहों में तो बिलकुल माना नहीं जा सकता. अगर इस प्रथा से दोनों में से किसी के भी मन में काम-वासना आती है, तो इस रिश्ते के तबाह होने का खतरा बना रहता है.”

ज्ञात हो कि दारुल उलूम ने एक और फतवा जारी किया है. मुस्लिम समुदाय में शादी की तारीख भेजने के लिए ‘लाल खत’ की रस्म को गलत बताया है. मुफ्तियों का कहना है कि ये रस्म गैर मुस्लिमों से आई है इसलिए इस रस्म को करना और इसमें शामिल होना जायज नहीं है. दारुल उलूम ने ऐसे जेवरों को भी पहनने के लिए मना किया है जिस पर कोई इमेज बना हो.कई मौलवियों ने दारुल उलूम के इस फैसले का स्वागत किया है.

 

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