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कश्मीर के बंद पड़े 50 हजार मन्दिरों में फिर बजेंगी घंटियाँ और गूंजेगा शंखनाद


वो तमाम मन्दिर बने थे इस्लामिक आतंक के शिकार. उस मन्दिर में पूजा करने वाले ही नही बचे थे तो वहां रौनक कैसे रहती.. एक रात को जब लाखो हिन्दुओ को घर छोड़ कर जाने का फरमान मिला था तो धर्मनिरपेक्ष भारत में कश्मीर से भागने वाले हिन्दू केवल एक चीज अपने साथ ले जा पाए थे और वो चीज थी उनके प्राण . उनका घर , जायदाद जमीन और यादें सब छूट गई थी कश्मीर में.. उसी के साथ छूट गये थे वो देवस्थल जहाँ उनके पूर्वज सदियों से पूजा अर्चना करते हुए आये थे .

अफ़सोस की बात ये है कि आंतकियो और अपराधियों की पैरवी करने वाला सेक्युलर समूह उस समय एकदम खामोश रहा था और उसमे से कुछ तो उन्ही आतंकियों के लिए शर्मिंदा होते सुनाई दिए थे.. कहा जाता है कि पाप का घडा भरता है और वो भर भी गया.. आतंकियों के लिए सेना के द्वारा चलाए गये आपरेशन आल आउट के बाद कश्मीर में सभी बड़े आतंकी मार डाले गये और पत्थरबाज भी धारा 370 हटने के बाद उस हैसियत पर आ गये जिस पर उन्हें देश देखना चाहता था.

अब एक नये एलान से एक बार फिर से झूम उठा है हिन्दू समाज .. सरकार जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान हटाने के बाद एक और बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने बंद पड़े लगभग 50 हजार मंदिरों और स्कूलों को लेकर एक सर्वे कराने का आदेश दिए हैं। इसके बाद संभवत: उन्हें खोला जाने की योजना है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि हमने कश्मीर घाटी में बंद स्कूलों की संख्या का सर्वेक्षण करने और उन्हें फिर से खोलने के लिए समिति का गठन किया है. यद्दपि ये मन्दिर क्यों तोड़े गये , इन्होने किसी का क्या बिगड़ा था जैसे शब्दों पर वामपंथी व सेक्युलर समाज के साथ टी वी पर मानवता को आगे रख कर बात करने वाले कई मजहबी उलेमा एकदम से खामोश हो जाते हैं .

 

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