जिसको पता ही नहीं बंगाल में अशांति का सबसे बड़ा गुनाहगार , उसको दे दिया गया था सबसे बड़ा पुरष्कार..


अमेरिकी रिपोर्टर जेनेट लेवी तक जान चुकी हैं कि पश्चिम बंगाल में अशांति की वजह कौन हैं . खुद बंगाल की पुलिस को कितना संघर्ष करना पड़ रहा है पश्चिम बंगाल को सही रास्ते पर लाने एक लिए उसके वीडियो और खबरें अक्सर सुनाई और दिखाई देती हैं .. एक वर्ग को खुश करने के लिए ममता बनर्जी ने जितने भी कदम उठाये हैं उसकी कोई नजीर दुनिया में नहीं मिल सकती है . लेकिन अफ़सोस सब देखने के बाद भी जिस प्रकार से सच को झूठ का आवरण पहनाया जा रहा है वो भी एक नजीर है ..

हर कोई ये जानता है कि बंगलादेशी घुसपैठियों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला राज्य पश्चिम बंगाल है.. मालदा से ले कर राजधानी कोलकाता तक आये दिन जिस प्रकार से बंगलादेशी घुसपैठी उन्मादी आतंक मचाते हैं वो सब देख रहे हैं लेकिन उसके बाद भी अगर सबसे बड़ा पुरष्कार पाने वाले किसी तथाकथित बुद्धिजीवी को कमी कहीं और लगे तो उसको मानसिक विकृति ही कहा जाएगा न कि कुछ और .. समाजिक आधार खत्म होने के बाद भी अभी भी कुछ नकली बुद्धिजीवियों के निशाने पर हिन्दू और हिंदुत्व ही है .

ध्यान देने योग्य है कि अपनी आदत से मजबूर हो कर एक बार फिर से कभी नोबेल पुरस्कार विजेता रहे अर्थशास्त्री अम‌र्त्य सेन ने हिंदुत्‍ववादी संगठनों पर निशाना साधा है.. उनके अनुसार इतिहास गवाह है कि बंगाल हमेशा से ही धर्म निरपेक्ष रहा है, लेकिन आज यहां पैदा हुई अशांति के लिए आरएसएस और हिंदुत्ववादी संगठन जिम्मेदार हैं। जबकि उन्होंने इतिहास के मुगलकालीन औरंगजेब और बाबर आदि के जमाने के पन्ने नहीं पढ़े शायद .. उनके अनुसार आरएसएस सरीखे हिंदुत्‍व वादी संगठन यहां अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं।


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