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“मुसलमान हैं हम, सरकार का नहीं बल्कि इस्लाम का कानून मांगेंगे”..- ये बयान एक सांसद के हैं जो लेता है संविधान की शपथ


ये कोई आम आदमी नहीं है जो कुछ भी कहा और निकल गया , न ही ये सोशल मीडिया पर शेखी बघारने वाला कोई कट्टरपंथी है जिसकी बात को मात्र मन का आवेश मान कर चुप रहा जाय.. ये वो जनप्रतिनिधि है जिसको सेक्युलर जनता ने भारी वोटों के साथ जिता कर संसद में भेजा है.. इसका साफ़ साफ़ एलान है की ये सरकार के द्वारा बनाया गया नियम और कानून नहीं मानेगा और खुद के साथ ये बाकी मुसलमानों का भी आह्वान कर रहा है ऐसा करने के लिए..

इनका नाम है बदरुद्दीन अजमल जो असम से सांसद हैं .. ये बंगलादेशी और रोहिंग्या के प्रबल समर्थक भी माने जाते हैं और संसद में जबर्दस्त पैरवी करते हैं उनको देश से न निकाले जाने की.. सेक्युलर नेताओं के लिए इनकी छवि बेहद प्रबल राष्ट्रभक्त और लोकप्रिय नेता के रूप में हैं लेकिन इनके बयान के बाद उस पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं . भारत आज जिन प्रमुख समस्याओं से जूझ रहा है उसमे मुख्य है बेतहाशा बढती हुई आबादी और उसी आबादी पर चिंता खुद प्रधानमन्त्री मोदी जता चुके हैं ..

सुदर्शन न्यूज के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कड़ा जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के लिए पूरे भारत की यात्रा की थी जिसको भारत बचाओ यात्रा के नाम से दुनिया भर में जाना गया था.. उसी के बाद देश भर में जनजागरण जैसा हुआ और हर किसी ने इस अतिगंभीर समस्या पर विचार करना शुरू किया .. उसी विचार को पहले उत्तराखंड सरकार ने मूर्त रूप दिया और उसके बाद तो असम सरकार ने इस पर बाकायदा मुहर भी लगा दी और शुरुआत की थी एक कड़े नियम के साथ .

असम इस से पहले भी NRC को ले कर चर्चा में रहा था जब इन्ही बदरुद्दीन जैसे नेताओं ने उसका व्यापक विरोध किया था जबकि उसमे उद्देश्य मात्र अवैध बंगलादेशियो को निकाल कर बाहर करना था.. मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल के नेतृत्व में चल रही असम की भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार ने असम राज्य में एक नया और बेहद जरूरी  कानून लागू किया है. इस कड़े कानून के प्रावधानों के मुताबिक जिसके दो से अधिक बच्चे होगें उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

अब इस कानून का स्वागत करने के बजाय बदरुद्दीन अजमल इसके विरोध में उतर आये हैं और उन्होंने भारत सरकार या राज्य सरकार के इस कानून से बढ़ कर इस्लामिक कानून को बताया है.. बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि मुस्लिम किसी की भी नहीं सुनेंगे और बच्चे पैदा करते रहेंगे ..  भारत के संवैधानिक ढाँचे पर हमला बोलते हुए बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि सरकार कोई भी कानून बना ले, मुस्लिम समाज पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चे पैदा करने के लिए जो भी बन पड़ेगा वो करेंगे।


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