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तीन तलाक की ही तरह सुप्रीम कोर्ट का एक और शानदार निर्णय जिसे सुन कर आप बोल पड़ेंगे ” जय हिन्द सर”

ये एक ऐसा फैसला है जो पत्थरबाजों के , आतंकियों के उन सहयोगियों के मुह पर तमाचे से ज्यादा दर्द दिया होगा जो तथाकथित धर्म निरपेक्षता का चोला पहन कर सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद को पालने पोषने में अपना ध्यान देने पर लगे हैं .. वो लोग जो मानवता की गलत परिभाषा गढ़ कर अपनी झोली लोगों की लाशों से भर रहे थे .. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उन पर कहर के समान ही गिरा होगा .. सुप्रीम कोर्ट में सेना और NIA के वार से कराहते जो आतंक समर्थक राहत की आस में पहुचे थे उन्हें अंत में सुप्रीम कोर्ट से भी उसी प्रकार का उत्तर मिला जो उन्हें कश्मीर में सेना दे रही है .

ज्ञात हो कि कश्मीर में जब ना तब कोई ना हिंसात्मक घटनाएॅ घटित होती रहती है इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जम्मू -कश्मीर में तब तक कोई भी अर्थपूर्ण वार्ता संभव नही हो पायेगी जब तक कि कश्मीर घाटी में कोई भी हिंसात्मक घटनाएॅ बिल्कुल थम सी नही जाती है। चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि किस से बात करे? इसलिए अगर सरकार से कोई वार्ता करना चाहता है तो पहले वो आतंक से तौबा करे .  ये असल में आतंकी समर्थकों को पैसे देने वालों पर जब से सेना और NIA का चाबुक चला तब से पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे उनके परोक्ष समर्थकों का होमवर्क था जो विफल हो गया .

तीन तलाक पर शानदार निर्णय देने के साथ पत्थरबाजों , उनके फाइनेंसरों अर्थात उनकी जड़ों पर वार कर रही भारत की सुरक्षा एजेंसियों पर कहर की तरह गिरे इस फैसले के बाद अब आतंक समर्थकों के हर वो मार्ग बंद हो चुके हैं जिस मार्ग से वो पहले कभी ना कभी किसी ना किसी प्रकार से निकल भागते थे .. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में कहीं ना कहीं से मोदी सरकार और फ़ौज के साथ NIA की आतंकवाद के समूल विनाश के लिए चल रहे सामूहिक प्रयासों को परोक्ष रूप से सही माना है और आतंकवाद निरोधक अभियान की राह में आने वाले सभी तत्वों के खिलाफ हो रही कार्यवाही को जायज ठहराते हुए किसी भी प्रकार की बातचीत को तब तक मना कर दिया जब तक कश्मीर में आतंकी सेना का शिकार नहीं हो जाते और भारत का हर व्यक्ति वहां निर्भय और निश्चिन्त हो कर भ्रमण कर सके .. 

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