कांग्रेस – JDS शासित कर्नाटक में बढ़े हिन्दू विरोधियो के हौसले. भगवान् श्री राम के खिलाफ लिखी गयी एक पुस्तक

हिन्दू और हिंदुत्व के खिलाफ जिस प्रकार से दुनिया भर में तमाम साजिशें रची जा रही हैं उसी का एक रूप देखने को मिला है कांग्रेस और जेडीएस शासित कर्नाटक में . दुनिया भर के मजहबी भावनाओं का सम्मान करने वाले तथाकथित लेखको में से एक ने एक बार फिर से हिन्दुओ के सर्वोच्च आराध्य प्रभु श्रीराम के खिलाफ जहरीली बातें लिखने के लिए प्रयोग किया है अपनी उस अभिव्यक्ति की आज़ादी का हथियार जिसके पीछे कई बार भारत माता तक के खिलाफ कुछ लोग बोल गये हैं

ज्ञात हो कि हिन्दुओ के विरोध में एक प्रकार से मतान्ध हो कर कर्नाटक के लेखक ने भगवान् श्रीराम का अपमान कर डाला है . हैरानी की बात ये है कि हिन्दूओ के सर्वोच्च देव के ऊपर आक्षेप लगाने वाले इस कथित लेखक के खुद के नाम में भगवान शब्द है और लोग इन्हें एस भगवान के नाम से जान कर इस गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं कि ये एक धार्मिक व्यक्ति है . जबकि इनको सरकार की तरफ से काफी सम्मानित लेखक माना जाता है .

इनकी लिखी किताब में भगवान राम का कथित तौर पर अपमान करने का आरोप लगा है। केएस भगवान के खिलाफ भगवान राम का अपमान करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि आईपीसी की धारा 295ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। कन्नड़ भाषा में लिखी इस किताब में दावा किया गया है कि राम कोई भगवान नहीं थे और वह अन्य मनुष्यों की तरह तमाम कमजोरियों के शिकार थे। खुद को के एस भगवान कह कर लोगों को हिन्दू नाम से भ्रमित कर रहे इस तथाकथित लेखक ने कन्नड़ भाषा में लिखी किताब ‘राम मंदिरा येके बेदा (क्यों राम मंदिर की नहीं है जरूरत) में ये दावा किया है कि भगवान राम कोई भगवान नहीं थे, बल्कि वो दूसरे लोगों की तरह कमजोरियों के शिकार थे।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंदू जागरण वेदिके मैसुरु के जिला अध्यक्ष के जगदीश हेब्बार ने भगवान राम का अपनी किताब में कथित तौर पर अपमानजक जिक्र करने के लिए लेखक भगवान के खिलाफ शनिवार को शिकायत दर्ज कराई थी। इस कुकृत्य से नाराज हो कर हिंदूवादी संगठनों ने शुक्रवार को इस तथाकथित लेखक के खिलाफ प्रदर्शन भी किया और उन्हें जेल भेजने की मांग की है। राज्य के वरिष्ठ बीजेपी नेता और विधायक एस सुरेश कुमार ने इस तथाकथित लेखक के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है . फिलहाल मध्य प्रदेश में वन्देमातरम को न गाने का आदेश जारी करने वाली कांग्रेस अपने द्वारा ही शासित कर्नाटक में इस बेहद गंभीर मुद्दे पर खामोश दिख रही है और उसके साथ स्वघोषित बुद्धिजीवी भी .


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