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“जय श्री राम” के नारों से गूँज गया गाजियाबाद जब बजरंग दल ने किया “रोहिंग्या को जाना होगा” का उद्घोष

ऐसा विषय जो भारत की एकता से सम्बन्ध रखता है . एक ऐसा मुद्दा जो बन चुका है जन जन की आवाज. यहाँ विषय है उनका जिन्हें भगवा वस्त्रों से भी चिढ है क्योकि उन्होंने उन बौद्धों का रक्त बहाया है जो आखिरकार हिन्दुओं के ही कुल से हैं . उनके हत्यारों को केवल नकली सेकुलरिज्म के नाम पर बसाने की कोशिशे हो रही हैं जिसे न्यायालय और सरकार से पहले जनता ने ही नकार दिया है .

गाजियाबाद में बजरंग दल के प्रतिनिधित्व में निकाला गया जुलूस एक नया इतिहास रच गया जिसमे रोहिग्याओं के खिलाफ पहले हिन्दू संगठन उसके बाद वहां की जनता भी सडको पर उतर आई और सीधा संदेश देते हुए रोहिंग्या मुक्त भारत की आवाज उठाई . हर वर्ग , हर आयु के लोगों का ये जुलूस शायद ही पहले गाजियाबाद की जनता ने देखा रहा हो जिस आवाज को सुदर्शन न्यूज ने सबसे पहले उठाया था राष्ट्र के हित में अब उसी आवाज में जनता ने भी अपने सुर मिला दिए हैं . विदित हो कि भारत की पावन भूमि पर बौद्धों के हत्यारों को किसी भी हालत में न सहन करने का संदेश ले कर अचानक ही गाजियाबाद की धर्मनिष्ठ जनता सडको पर निकल आई .. 
हजारों की संख्या में हिन्दू संगठनो के पदाधिकारी और आम जनमानस सडको पर निकल आया और हर तरफ रोहिंग्या वापस जाओ के नारे लगने लगे.. भीड़ की विशालता इतनी थी कि प्रशासन को बेहद सतर्क रहना पड़ा पर संयमित जनता ने बिना कानून के उल्लंघन के अपनी बात को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से सत्ता के शीर्ष तक पंहुचा दिया . रोहिंग्या के समर्थन में तमाम फर्जी खबरे चलाने वाले तमाम मीडिया संस्थानों पर भी जनता का गुस्सा फूटा और उन्होंने सत्य , न्याय और राष्ट्रहित की इस लड़ाई में सुदर्शन न्यूज के साथ और सहयोग की भूरि भूरि प्रशंसा की . इस आयोजन को बजरंग दल के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री सुभाष बजरंगी , धर्मेन्द्र बजरंगी, अशोक बजरंगी , विक्रम सिंह आदि ने आयोजित किया जिसमे अचानक ही गाजियाबाद शहर भगवा रंग में रंगा नजर आने लगा . 
श्री सुभाष बजरंगी जी ने तो रोहिंग्या मामले में किसी भी प्रकार की शर्त और संधि को किनारे रखने और केवल और केवल राष्ट्रहित को ध्यान में रख कर बिना विलम्ब के इन्हें निकाल बाहर करने की मांग की . स्थानीय जनता ने भी इस अभियान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और रोहिंग्या को किसी भी हालात में भारत की भूमि से अविलम्ब मुक्त कराने की केंद्र सरकार व् न्यायालय से मांग की .. इस जुलूस में शामिल कई बुजुर्गों ने अपने आने वाली पीढ़ियों की चिंता जताई और कहा की वो नहीं चाहते की उनकी औलादों को बौद्धों की तरह कत्लेआम देखना और झेलना पड़े . इसी जुलूस में शामिल युवाओं का कहना था कि उन्हें अपने जीवन को बेहद शान्ति और संयमित रूप से जीना है जो रोहिंग्या जैसे आरकान कुख्यात आतंकी दस्ते के भारत की मौजूदगी में रहते किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है . 
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