2019 से पहले ईसाईयों व मुस्लिमों को एक रहने का फरमान आया प्रयागराज से.. मिल कर बोले – “2019 में एकजुट रहना है”

कहने के लिए तो उस सम्मेलन में राजनीति से दूरी बनाने की पैरवी की गई थी लेकिन खुल कर लिया गया वहां 2019 के चुनावों का नाम .. एक तरह से ये सम्मेलन मुसलमानो व ईसाईयों की एकता का प्रतीक बन गया जिन्हें 2019 के चुनावों में एक रहने का नया सन्देश मिला ..ये सम्मेलन उस प्रयागराज की पावन भूमि पर हुआ जिसे कुछ दिन पहले अकबर के जबरन दिए कलंक रूपी नाम इलाहाबाद से बदलने का साहस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उनके मंत्रिमंडल ने कर दिखाया था लेकिन किसी ने उस पर धन्यवाद या खुशी की प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की..

विदित हो कि संगम नगरी के मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर आज सेमिनार का आयोजन हुआ अतिथि हिन्दू नाम से साधना सदन  चलाने वाले निदेशक ईसाईयों में फादर कहे जाने वाले लियो शामिल हुए उन्होंने अपनी सदारतती तक़रीर में अल्पसंख्यक और इंसान आज की मीडिया पर कई बात रखी और अखिर में कहा 2019 चनाव आ रहे कुछ लोग आपस में दंगे कराने की कोशिश करेंगे पर हम सब ऐसा नही होने देगे …

अक्सर हिन्दू परम्परा में प्रयोग होने वाले नाम से रखे गए शताब्दी समारोह में साधना सदन के निदेशक लियो ने ईसाई अल्पसंख्यक संस्थाओं को देश का विकास करने में महान योगदान देने वाला बताया जबकि उन्होंने धर्मान्तरण पर एक शब्द नही बोला और न ही उड़ीसा में मिशनरियों के हाथों बेरहमी से कत्ल हुए स्वामी लक्ष्मणानंद जी आदि के बारे में .. लियो के अनुसार तो  वतन के विकास में ईसाई संस्थाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है, और उन्होंने इस पर विस्तार से बात भी रखी, जिस पर वहां मौजूद मुस्लिम जानकारों ने तालियां भी बजाई .. इविवि उर्दू विभाग के प्रो. अली अहमद फातमी ने प्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में स्थापित अल्पसंख्यक संस्थाओं के अतीत, वर्तमान एवं भविष्य की संभावित योजनाओं के बारे में तल्खी से अपने विचार रखे..

नॉलसार विश्वविद्यालय हैदराबाद के कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को रियायत नहीं अधिकार चाहिए। भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में स्पष्ट रूप से वर्णन है। जरूरत इस बात की है कि लाभार्थी को इसका लाभ मिल सके। मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को आयोजित शताब्दी समारोह में ‘देश की उन्नति एवं विकास में अल्पसंख्यक संस्थानों का योगदान’ विषयक संगोष्ठी में प्रो. फैजान ने ये बातें कहीं। उन्होंने देश में मध्यकाल से लेकर आजाद भारत में अब तक का विस्तृत उल्लेख करते हुए अल्पसंख्यकों की भूमिका को रेखांकित किया।। जबकि बाबर, तुगलक, तैमूर, औरंगजेब आदि के हिन्दू समाज पर किये गए अंतहीन अत्याचारों के बारे में एक भी शब्द चर्चा नही की गई ।।

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