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बौद्धों के कत्लेआम का सेंटर बनाने की तैयारी थी भारत को.. बाकायदा तैयार हो चुकी थी पटकथा

बिहार की राजधानी पटना से गिरफ्तार बंगलादेश के दो इस्लामिक आतंकी खैरूल मंडल और अबु सुल्तान से पूंछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पूंछताछ में सामने आया है कि इन आतंकियों के द्वारा बौद्धों के कत्लेआम को अंजाम दिया जाना था. पता चला है कि  ये दोनों पटना के किसी बाहरी और बेहद सामान्य इलाके में एक छोटा मकान खरीदने के फिराक में थे, ताकि इसे ये अपने ठहरने के स्थल और आतंकी ऑपरेशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल कर सके.

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सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि दोनों आतंकी फर्जी नाम और पता के आधार पर ही घर खरीदना चाहते थे. उन्होंने बांग्लादेश से अपने दो साथी आतंकियों को अवैध तरीके से यहां बुलाने की सेटिंग तक कर ली थी. घर लेने के बाद इनका मुख्य धंधा अपने लोगों का फर्जी आइडी प्रूफ बनवाना और उन्हें स्थानीय स्तर पर छोटी-मोटी नौकरी दिलाना होता. इससे पहले भी ये लोग पटना का चक्कर लगा चुके थे और उस दौरान भी पटना जंक्शन स्थित इसी मदनी मुसाफिरखाने में ही आकर रुके थे.

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दोनों आतंकी ठहरने के लिए किसी होटल या लॉज का उपयोग नहीं करते थे, क्योंकि होटलों में सीसीटीवी कैमरे लगे रहते हैं और ठहरने के लिए फोटो आइडी प्रूफ चाहिए. इससे बचने के लिए ये लोग मुसाफिरखाना या धर्मशाला का उपयोग करते थे. होटलों के कैमरे में इनकी तस्वीरें कैद न हो जाएं, इसका खासतौर से ध्यान रखते थे. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि उन्होंने बिहार के कई बौद्ध स्थलों की अच्छे से रेकी की थी. इनमें सबसे ज्यादा रेकी उन्होंने बोधगया के महाबोधि मंदिर की थी.

पता चला है कि इस्लामिक आतंकियों की योजना महाबोधि मंदिर के अलावा एक अन्य बौद्ध स्थल पर सीरियल ब्लास्ट करने की थी. इन आतंकियों के संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन ने कुछ साल पहले भी बोधगया में सीरियल बम ब्लास्ट करने की योजना बनायी थी, लेकिन वह फेल हो गयी थी. धमाके के पहले ही सभी बम पकड़े गये थे. इस बार इनकी योजना फूलप्रूफ थी, ताकि धमाका हर हाल में सफल हो सके. इन लोगों ने बिहार में गया, पटना के अलावा भी कुछ अन्य शहरों में ट्रैवेल किया है. राज्य में कुछ स्थानों पर इनके स्लीपर सेल के मौजूद होने की भी सूचना मिली है. फिलहाल इन तमाम पहलुओं पर गहन जांच चल रही है.

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ये भी पता चला है कि ये आतंकी तीन महीने से ज्यादा समय से भारत में थे. हालांकि, इन पर खुफिया एजेंसियों की लगातार नजर बनी हुई थी. इस दौरान उन्होंने कई शहरों का दौरा किया और कई लोगों से मुलाकात की. उन सभी लोगों के डिटेल निकाले जा रहे हैं. ये लोग नादिया (पश्चिम बंगाल), सिलीगुड़ी, केरल, हैदराबाद, मुंबई, पुणे, दिल्ली, गया और पटना जा चुके हैं. नादिया जिले में इनके कुछ लोगों के छिपे होने की आशंका सबसे ज्यादा जतायी जा रही है. इनके घूमने, ठहरने और खाने के पैसे इन तक हवाला और वेस्टर्न मनी ट्रांसफर के जरिये बाहर से पहुंचते थे. इनके टेरर फंडिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क की भी जांच गहनता से चल रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को ब्रेक किया जा सके. इसके कुछ बेहद अहम सुराग जांच एजेंसियों को मिले हैं.

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