पुलिस से मदद सब को चाहिए, लेकिन जब पुलिस को मदद की जरूरत हो तो उनका दिल्ली पुलिस के ASI बेदीराम जैसा होता है हाल. क्या समाज की रक्षा सिर्फ वर्दी वालों का दायित्व ?

इस घटना को पढ़ कर आप एक बार सोच में पड़ जायेंगे कि क्या इस देश और समाज की रक्षा करने का दायित्व सिर्फ वर्दी वालों का ही है ? क्या समाज के बाकी तबके के कुछ अन्य लोग इस देश के संसाधन और सुविधाओं का उपयोग नहीं कर रहे हैं ? क्या उनकी एक बार भी जिम्मेदारी नहीं बन रही थी कि सडक पर पड़ा गोली से घायल एक पुलिसवाले को वो कम से कम एम्बुलेंस बुलवा कर अस्पताल तक ही भिजवा दें .. ऐसे कई अन्य सवाल भी हैं जो दिल्ली की इस घटना से उठ खड़े होंगे .

विदित हो कि वर्तमान समय की संवेदनहीनता को जीवंत रूप में दिखाती और दुनिया के सामने लाती एक घटना घटी है दिल्ली में जहाँ पर लुटेरों का सामना करते हुए गोली से घायल दिल्ली पुलिस का एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर काफी देर तक सडक के किनारे गोली से घायल पडा रहा और न जाने कितने लोग उसको उसी हालत में घायल देख कर ही आगे निकल गये . अब तक मिली जानकारी के अनुसार ये दुस्साहसिक घटना तब हुई जब दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर ने बाइक सवार दो बदमाशों को लूट करने से रोका . इसके बाद उन बदमाशों ने ASI को गोली मार दी .

यहाँ पर सराहना करनी होगी उस ASI की जिसने अकेले होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और दो बदमाशो से मुठभेड़ की .. यकीनन अगर गोली न चलती तो बदमाशो को ही हारना पड़ता .. इस घटना में पुलिस वालों की बेबशी भी सामने आती है जो उनके ऊपर लादे गये तमाम नियम कानून और बेडियो से जाहिर होती है . उनके ऊपर चली गोलियां भले ही भारत की मीडिया के एक वर्ग में चर्चा का विषय न बने लेकिन उनके द्वारा अपराधियों और यहाँ तक कि आतंकियों के ऊपर चलाई गोलियां तो दूर मारा गया थप्पड़ भी ऐसे दुष्प्रचारित कर दिया जाता है जैसे कि उन्होंने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो ..

फिलहाल इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश खुद एएसआई का ही पर्स लूटकर फरार हो गए। पर्स में पुलिसकर्मी के बेहद जरूरी दस्तावेज थे। बदमाशो की गोली एएसआई के पेट में लगी थी जिसको देख कर भी तमाम लोग आगे बढ़ गये . यद्दपि आगे बढे लोग पीछे एक सवाल छोड़ कर गये थे कि पुलिस उन्हें उनकी सहायता के लिए तत्काल चाहिए लेकिन जब किसी पुलिसकर्मी को सहायता की जरूरत हो तो क्या उनके द्वारा किया गया कृत्य सही है ?

वारदात नॉर्थ डिस्ट्रिक के कोतवाली इलाके में हुई जहां गुरुवार रात ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे।  48 वर्षीय एएसआइ बेदी राम की ड्यूटी हजरत निजामुद्दीन थाने में है और वह परिवार के साथ सीलमपुर इलाके में रहते हैं। बताया ये भी जा रहा है कि खून से लथपथ ASI बीच रोड पर वाहन चालकों से मदद मांग रहे थे, लेकिन कोई नहीं रूका। बेदी राम को इलाज के लिए एम्स में भर्ती करवाया गया।  यहाँ प्रशंसा के पात्र अंकुर जी है जो ASI को तत्काल अस्पताल पहुचाये . निश्चित रूप से अंकुर जैसे व्यक्ति ने दिल्ली में मानवता और सौहार्द कायम है का संदेश दिया जो उधर से गुजरने वालों के लिए एक बड़ा संदेश है . इस घटना से एक संदेश भी मिलता है कि आप के रक्षको को कभी आप की भी जरूरत पड़ सकती है जिनसे आप का मुह फेरना संवेदनहीनता ही कही जायेगी . फिलहाल तमाम लोग दिल्ली पुलिस के जाबाज़ ASI बेदीराम के जल्द स्वस्थ होने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं .

 

 

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