आज़म खान ने बताया कि उनके हिसाब से मुसलमान किस क़ानून को मानते हैं और क्या है उनकी नजर में भारत के कानून की अहमियत

विवादित बयानों के लिए मशहूर समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान ने देश को बताया है कि उनके अनुसार मुसलमान किस कानून को मानता है और किसको नहीं मानता. इसी के साथ आज़म खान ने ये भी साफ़ कर दिया है कि उनकी नजर में भारत के कानून, भारत के संविधान की क्या अहमियत है. आज़म खान ने कहा है कि देश का मुसलमान सिर्फ और सिर्फ कुरआन के कानून को मानता है, इसके अलावा और कोई क़ानून उनके लिए मायने नहीं रखता.

आपको बता दें कि तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला बिल लोकसभा से पास हो गया है, जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. तीन तलाक पर जारी सियासी बयानबाजी के बीच सपा नेता आजम खान ने गुरुवार को तीन तलाक को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस बिल से मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि मुसलमान कुरान और हदीस के अनुसार चलता है. इसमें पूरी प्रक्रिया दी गयी है. ऐसे में हमारे लिए कुरान के अलावा कोई कानून मान्य नहीं है. तलाक के मामले में हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया के मुसलमान कुरान के कानून को मानते हैं.

आज़म खान ने कहा है कि मुसलमान के लिए कुरान मान्य है. तीन तलाक पर कानून क्या कहता है, इससे मुसलमानों का कोई लेना-देना नहीं है. आजम ने कहा कि कुरान को मानने वाले मुसलमान जानते हैं कि तलाक लेने के लिए क्या करना है. कुमार में तलाक के बारे में सबकुछ लिखा है और उनका मानना है कि कुरान में लिखे के अलावा तलाक के लिए कोई कानून मान्य नहीं है। तलाक लेने के लिए मुसलमानों को सिर्फ कुरान का कानून ही मानना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुसलमान जहां कहीं भी है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ कुरान का कानून ही मान्य है. दूसरा कोई भी कानून मुसलमानों के लिए मान्य नहीं है. यह हमारा मजहबी मामला है. मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड है. यह हमारा व्यक्तिगत मामला है कि मुसलमान कैसे शादी करेगा और कैसे तलाक लेगा.

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