वो पादरी था इसलिए पा गया जमानत जबकि उसके अपराध किसी दानव से कम नही थे ..ये है न्यायपालिका का न्याय ?

क्या भारत की न्यायपालिका आरोपी की जाति या धर्म देखकर फैसला सुनाती है? क्या एक जैसे ही मामले में दो अलग अलग धर्म के व्यक्तियों में एक को जमानत व एक को सजा दी जा सकती है? इस प्रश्न के जवाब में आप निश्चित रूप से ये कहेंगे कि भारत की न्यायपालिका में ऐसा नहीं होता. लेकिन अगर ऐसा हो सके या किसी केस में हो तो आपकी प्रतिक्रिया न्यायपालिका के प्रति क्या होगी? हम बात कर रहे हैं ईसाई नन के साथ बलात्कार करने वाले पादरी फ्रैंकलो मलक्कल की जिसे
केरल हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है. केरल हाईकोर्ट के इस फैसले पर अचंभा इसलिए हो रहा है क्योंकि एकतरफ बलात्कार के आरोप में हिन्दू धर्मगुरु आसाराम बापू को जब से गिरफ्तार किया गया तब से एक बार भी जमानत नहीं दी गई तथा उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई लेकिन ईसाई नन का कई बार बलात्कार करने वाली ईसाई पादरी को जमानत मिल गयी?

हम यहां न्यायपालिका की खिलाफत नहीं कर रहे हैं लेकिन एक बार को मन में सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या फ्रैंकलो मलक्कल को इसलिए जमानत मिली है क्योंकि वह ईसाई था? अगर नहीं तो फिर आसाराम बापू को सजा तथा फ्रैंकलो जमानत क्यों जबकि ईसाई पादरी मामले में नन ने कहा है कि पादरी उसके साथ एक नहीं बल्कि कई बार डरा धमकाकर यौनाचार करता रहा है. आपको बता दें कि केरल हाई कोर्ट ने नन के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार बिशप फ्रैंको मलक्कल को जमानत दे दी है. बिशप पर 2014 से 2016 के बीच एक नन से कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा है. जमानत देने के साथ ही केरल हाई कोर्ट ने उन्हें केरल में प्रवेश नहीं करने का निर्देश दिया है, इसके अलावा अदालत के समक्ष उन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा कराना होगा.

ज्ञात हो कि इससे पहले 3 अक्टूबर को कोर्ट ने बिशप की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी. उस वक्त अदालत ने अभियोजन की यह दलील स्वीकार कर ली थी कि समाज में ऊंचा दर्जा रखने वाला यह आरोपी जमानत दिए जाने पर इस मामले के गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा लेकिन अब कोर्ट ने ईसाई धर्मगुरु फ्रैंकलो मलक्कल को जमानत दे दी. बता दें कि जून में केरल की कोट्टायम पुलिस को दी गई शिकायत में नन ने आरोप लगाया था कि मलक्कल ने मई 2014 में कुरविलांगड़ के एक गेस्ट हाउस में उनसे बलात्कार किया और बाद में कई मौकों पर उनका यौन शोषण किया. नन ने कहा कि चर्च के अधिकारियों ने जब पादरी के खिलाफ उनकी शिकायत पर कोई कदम नहीं उठाया तो उन्होंने पुलिस का रुख किया. बहसीपन की सारे हदें पार करने वाली ईसाई बिशप फ्रैंकलो मलक्कल को जमानत के बाद सवाल जरूर खड़ा होता है कि अगर फ्रैंकलो को जमानत मिल सकती है तो आसाराम बापू को क्यों नहीं? इस प्रश्न का जवाब न सिर्फ आसाराम बापू के भक्त बल्कि हर देशवासी जरूर चाहेगा कि बलात्कारी पादरी को जमानत क्यों मिली?

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