कमलेश तिवारी हत्याकांड में सामने आया बरेली आला हजरत दरगाह कनेक्शन.. दरगाह के मौलवी ने इस तरह की थी मदद


हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड में एक के बाद एक हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं. जिस तरह के कमलेश तिवारी की हत्या की गई तथा उसके बाद गिरफ्तार हुए लोगों से पूंछताछ में जो बड़ी बात सामने आई है वो ये है कि कमलेश तिवारी की ह्त्या कोई साधारण हत्या मात्र नहीं थी बल्कि इसके पीछे मजहबी उन्मदिता थी. कमलेश तिवारी की हत्या में उन इस्लामिक मौलानाओं ने भी अहम् भूमिका निभाई थी जो स्वयं को सहिष्णुता, अमन व मोहब्बत का सन्देशवाहक बताते हैं.

फिलहाल कमलेश तिवारी की ह्त्या करने वाले अशफाक तथा मोइनुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया है. एटीएस और पुलिस की पूछताछ में दोनों हत्यारोपी शेख अशफाक हुसैन और पठान मोइनुद्दीन अहमद ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. उन्होंने बताया कि कमलेश तिवारी के विवादित बयानों के चलते उनकी हत्या की गई. उन्हें मंगलवार सुबह एसआईटी लखनऊ लेकर आई. यहां पूछताछ में कई खुलासे हुए. लेकिन   यहां बात करेंगे बरेली आला हजरत दरगाह के मौलवी सैय्यद कैफ़ी अली की, जिसे यूपी ATS ने कल गिरफ्तार किया था.

एसआईटी सूत्रों का दावा है कि बरेली निवासी दरगाह आला हजरत के मौलाना मौलाना सैय्यद कैफी अली रिजवी ने ही घायल हत्यारे की बरेली में मरहम-पट्टी करायी थी. एसआईटी को शक है कि हत्यारों को आगे की यात्रा के लिए मौलाना ने पैसा भी मुहैया कराया है. लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या के बाद आरोपितों की लोकेशन लखनऊ के बाद शाहजहांपुर, बरेली व मुरादाबाद के बाद अम्बाला मिलने की सूचना पर पुलिस की टीमें बेहद सक्रिय थी. इसी दौरान सूचना के आधार पर यूपी ATS ने मौलाना कैफ़ी अली को गिरफ्तार किया था.

जानकारी के अनुसार लखनऊ में 18 अक्टूबर को कमलेश तिवारी की हत्या करने के बाद दोनों आरोपी मौलाना से मिलने बरेली आए थे. मौलाना पर आरोपियों की मदद करने का आरोप है. एटीएस की हिरासत में लिए गए 26 वर्षीय मौलाना सैय्यद कैफी अली रिजवी दरगाह से लेकर बड़ी-बड़ी कॉन्फ्रेंस में अपने नातिया कलाम पढ़कर युवाओं को दीवाना बनाता है. देश-विदेश से लेकर यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उसके नातिया कलाम की धूम है. एटीएस मौलाना के पाकिस्तान में कराची से लेकर बगदाद तक के कनेक्शन खोजने में लगी है. उसके कमलेश तिवारी हत्याकांड के साजिशकर्ता और सूत्रों से संपर्क के बाद लगातार पूछताछ की जा रही है.

मौलाना कैफी अली नातिया कलाम पढ़ता है युवाओं में उसके नथिया कलाम की दीवानगी है. बरेली से लेकर विदेशों तक नातिया कलाम पढ़ने जाता है. 3 साल पहले व उमरा करने के लिए मक्का गया था. 2 साल पहले पाकिस्तान के कराची में अपनी बहन के पास गया था. सोमवार रात को ही शहर के एक खास शादी समारोह में उसने नातिया कलाम पड़ा था. वह नातिया कलाम के प्रोग्राम के सिलसिले में बगदाद जाने की तैयारी में था. इससे पहले ही कमलेश तिवारी हत्याकांड में साजिशकर्ता सूत्रों की मदद के आरोप के रूप में मौलाना पकड़ा गया.

कमलेश तिवारी की ह्त्या को ह्त्या के सूरत के साजिशकर्ता के संपर्क में मौलाना सैयद कैफ़ी अली कैसे आया, उनसे उसकी क्या बातचीत हुई, मौलाना ने उनकी कैसे व् क्या मदद की., इस सबकी जानकारी जुटाई जा रही है. साथ ही इसका पता लगाया जा रहा है कि उसके साथ बरेली में और कौन कौन लोग शामिल हैं. एटीएस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है.


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