जब कुछ नए बौद्ध जहर उगल रहे थे हिंदुओं पर तब बिहार में रची जा रही ये साजिश बौद्धों के खिलाफ.. कश्मीरी हिन्दुओं के बाद कौन था निशाने पर ?

शायद इस बात से उन कथित नवबौद्धों की आखें खुल जाएँ तो जातिवादी कहर से ग्रसित होकर हिन्दुओं के खिलाफ उगलते हैं. जिन कथित मजहबी उन्मादियों ने झांसे में जब ये कथित नवबौद्ध हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगल रहे थे ठीक उसी समय बिहार में बौद्धों के खिलाफ उसी तरह की साजिश रची जा रही थी, जैसे कभी कश्मीर में हिन्दुओं के खिलाफ रची जा रही थी.

खबर के मुताबिक़, इस साल 25 मार्च को पटना जंक्शन से गिरफ्तार किये गये तीन बांग्लादेशी आतंकियों के खिलाफ  पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल कर दिया. तीनों आतंकी खैरूल मंडल, अबु सुल्तान व शरीपत मंडल इस्लामिक स्टेट ऑफ बांग्लादेश के सदस्य हैं. तीनों आतंकियों से पूछताछ में जो अहम खुलासा हुआ है, उसका जिक्र आरोपपत्र किया गया है. मामले की जांच में यह बात सामने आयी है कि इन लोगों ने गया जिले में अपना आत्मघाती दस्ता तैयार कर लिया है. इसके साथ ही बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिवेंद्रम, महाराष्ट्र, पंजाब व जम्मू-कश्मीर में भी आत्मघाती दस्ता बना चुके हैं.

आतंकी ये तीनों देश के राज्यों में घूम-घूम कर अपने संगठन को मजबूत करने के लिए युवकों को जोड़ने का काम कर रहे थे. इनका मंसूबा धर्म को लेकर जेहाद करना था. ये भी जानकारी मिली है कि इनके निशाने पर बिहार के गया का प्रसिद्द बौद्ध मंदिर था जहाँ ये इस्लामिक आतंकी खून खराबा करने की फिराक में थे, बड़े आतंकी हमले की फिराक में थे. इसके अलावा देश की कई प्रमुख जगह इन आतंकियों के निशाने पर थीं.

बता दें कि ये तीनों इस्लामिक आतंकी बांग्लादेश में भी 2017 में विस्फोट कर फरार हो गये थे. इसके बाद जेएमवी संगठन व आइएसआइएस से जुड़ गये थे. लेकिन, फिर भारत को अपना ठिकाना बना लिया था और आतंकी गतिविधि में संलिप्त थे. मालूम हो इन तीनों को गुप्त सूचना के आधार पर पटना जंक्शन इलाके से 25 मार्च को पकड़ा गया था और इन लोगों के पास से मोबाइल फोन व कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किये गये थे. तब इनसे पूंछताछ में हैरान करने वाले खुलासे हुए थे.
उस समय आतंकियों ने कबूला था कि ये लोग ठहरने के लिए किसी होटल या लॉज का उपयोग नहीं करते थे, क्योंकि होटलों में सीसीटीवी कैमरे लगे रहते हैं और ठहरने के लिए फोटो आइडी प्रूफ चाहिए. इससे बचने के लिए ये लोग मुसाफिरखाना या धर्मशाला का उपयोग करते थे. होटलों के कैमरे में इनकी तस्वीरें कैद न हो जाएं, इसका खासतौर से ध्यान रखते थे. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि उन्होंने बिहार के कई बौद्ध स्थलों की अच्छे से रेकी की थी. इनमें सबसे ज्यादा रेकी उन्होंने बोधगया के महाबोधि मंदिर की थी.

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए हमें सहयोग करेंनीचे लिंक पर जाऐं


राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW

Share