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नाम था कलामंदिर फिर भी परोस दिया गौ माँस, फिर भी दोष केवल गौ सेवकों का

रविवार को मैसूर के कलामंदिर में “खाद्य संस्कृति और व्यक्तिगत आज़ादी” के शीर्षक पर 3 दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ था। आयोजकों पर आरोप है कि उन्होंने कलामंदिर के ऑडीटोरियम में बीफ परोसा है। खाने की आजादी नामक इस प्रोग्राम में लोगो को बीफ परोसा गया और कई लोग बीफ खाते हुए नज़र आये। आपको बता दे कि हाल ही में मोदी सरकार ने मवेशियों की हत्या पर रोक लगाने के लिए नया कानून पारित किया है जिसके अंतर्गत मवेशियों की हत्या को कानूनन अपराध करार दिया गया है। बीफ परोसने पर चरावाका सामाजिक और सांस्कृतिक ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही है।  
रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजकों ने इस कार्यक्रम में नाश्ता और दोपहर के भोजन का इंतेज़ाम किया था, जिसमें चिकन और बीफ की डिश थी। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को इस कार्यक्रम में बीफ परोसने पर आपत्ति जताई और कलामंदिर के बाहर शुद्धिकरण समारोह का आयोजन किया। रिपोर्ट के मुताबिक घटना की निंदा करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने आम के पत्तों के इस्तेमाल से गोमूत्र का छिड़काव किया। डिप्टी कमिश्नर डी रणदीप ने कहा कि कार्यक्रम आयोजकों ने खाने का इन्तेजाम करके नियमों का उल्लंघन किया है।  
डिप्टी कमिश्नर डी रणदीप ने कहा कि कार्यक्रम आयोजकों ने खाने का इन्तेजाम करके नियमों का उल्लंघन किया है। मुद्दा यह नहीं है कि वे बीफ खा रहे हैं या नहीं, मुद्दा यह है कि भोजन स्थल के अंदर परोसा गया। जिससे मानक नियमों का उल्लंघन हुआ है। जबकि यहां अगर खाना परोसा जाता है तो वह केवल शाकाहारी खाना होना चाहिए जिसे कलामंदिर के बाहर परोसा जाए। रिपोर्ट के अनुसार आयोजकों को कलमांदिर में भविष्य में होने वाले आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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