40 मुकदमों में बरी हुए हिन्दू जिन्हें लादा गया था अखिलेश सरकार के समय में.. बरी होने के बाद लगाये “जय श्रीराम” के नारे

2013 में उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगों से जुडी बड़ी खबर सामने आई है. ये वो खबर है को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की सरकार की मानसिकता को बेनकाब कर दे देगी. खबर के मुताबिक़, दंगों को लेकर उस समय 41 मामले दर्ज किये थे जिनमें 40 मामले हिन्दुओं पर तथा 1 मामला मुस्लिम पक्ष पर दर्ज किया था. हिन्दू पक्ष पर लगाए गए सभी 40 मुकदमें झूठे साबित हुए है, स्थानीय कोर्ट द्वारा दिए फैसले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है.

प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, अभियोजन पक्ष के पांच गवाह कोर्ट में गवाही देने से इसलिए मुकर गए कि अपने संबंधियों की हत्या के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे. गवाहों का कहना है कि उनसे डरा-धमकाकर बयान दिया दिलवाया गया था. वहीं 6 अन्य गवाहों ने कोर्ट में कहा कि तत्कालीन पुलिस ने जबरन खाली कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए है, और उन्हें गवाह के तौर पर पेश कर दिया था. बता दें कि मुजफ्फरनगर में साल 2013 में हुए दंगे में कम से कम 65 लोग मारे गए थे.

दंगे के सभी मामले अखिलेश सरकार के कार्यकाल के दौरान दर्ज किये गए थे और जांच शुरू की गई थी. इस साल 8 फरवरी को एकमात्र माममें में आरोप साबित हो पाया है. सत्र न्यायालय ने सात आरोपियों- मुज़म्मिल, मुज़स्सिम, फुरकान, नदीम, जांगिड़, अफ़ज़ल और इकबाल को 27 अगस्त को कवाल गाँव में चचेरे भाई गौरव और सचिन की ह्त्या करने के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है. मजहबी उन्मादियों की भीड़ द्वारा सचिन तथा गौरव की क्रूरतम ह्त्या के बाद ही क्षेत्र में दंगे भड़के थे. ख़बरें ये भी सामने आई थी कि तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री आज़म खान ने पुलिस प्रशासन पर दवाब बनाकर निष्पक्ष कार्यवाई नहीं करने दी थी तथा एकतरफा कार्यवाई की गई थी.

Share This Post