1 साल में ही ताजमहल की नकली प्रेम कहानी पर भारी पड़ा देश की एकता का प्रतीक “स्टेच्यू ऑफ यूनिटी” .. सरदार पटेल की प्रतिमा ने इस मामले में पछाड़ा ताजमहल को


शायद यही वो न्यू इंडिया है, यही वो बदला हुआ भारत है जिसे देश के कथित बुद्धिजीवी तथा नकली सेक्यूलर लोग स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं. नकली कहानियों के आधार पर गढ़े गए तथ्यों के भ्रमजाल में देश की जनता को अभी तक उलझा कर रखा गया था वो भ्रमजाल अब टूटता हुआ नजर आ रहा है तथा देश अब नकली इतिहास के बजाय देश के वास्तविक हीरोज को न सिर्फ सम्मान दे रही है बल्कि उन्हें गर्व के साथ स्वीकार भी कर रही है.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण है देश के प्रथम गृहमंत्री/उपप्रधानमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का स्मारक “स्टेच्यू ऑफ यूनिटी” . स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को बने हुए अभी 1 साल ही हुआ है लेकिन 1 साल के अंदर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने ताजमहल को एक मामले में पीछे छोड़ दिया है. पुरातत्व अध्ययन और सांस्कृतिक स्मारकों के अनुरक्षण के सर्वे में कहा गया है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश के श्रेष्ठ 5 स्मारकों में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला स्मारक बन गया है.

इस सर्वे की जो सबसे अहम बात है वो ये है कि ताजमहल ने जहां एक साल में 56 करोड़ की कमाई की है तो Statue Of Unity ने 63 करोड़ की कमाई की. बता दें कि बीते 31 अक्टूबर को ही स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी को बने एक साल पूरा हुआ है और इस एक साल में ही स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने ताजमहल को पछाड़ दिया है. ये सर्वे इस बात को साबित करता है कि देश अब ताजमहल को लेकर मुगल आक्रांता शाहजहां व मुमताज को लेकर गढ़ी गई नकली प्रेमकहानी के बजाय देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले सरदार पटेल के साथ है.

बता दें कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 182 मीटर ऊंची (597 फीट) है और ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. ये मूर्ति गुजरात में सरदार सरोवर बांध से 3.2 किलोमीटर दूर साधू बेट नाम के स्थान पर है जो नर्मदा नदी पर एक टापू है.


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