सिर्फ सूरत और बरेली तक सीमित नहीं था कमलेश के क़त्ल का ताना-बाना.. वो 7 और भी थे जो रहते थे उनके आस पास


हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में बड़ी खबर सामने आई है. कमलेश तिवारी की ह्त्या लखनऊ में उनके घर में घुसकर की गई थी तथा इसकी प्लानिंग गुजरात के सूरत में रची गई थी. कमलेश तिवारी की मौत का बरेली कनेक्शन भी सामने आया है जहाँ के आला हजरत दरगाह के मौलाना ने कमलेश के हत्यारों की मदद की थी, उनका इलाज कराया था. लेकिन जो बड़ी खबर सामने आई है वो ये है कि उन्मादी पहले कमलेश तिवारी को सूरत बुलाकर मारना चाहते थे लेकिन इसमें सफल न होने पर लखनऊ में वारदात को अंजाम दिया गया.

पता चला है कि पैगंबर मुहम्मद साहब पर 2015 में टिप्पणी के बाद से ही कमलेश तिवारी को जान से मारने की साजिश रची जा रही थी. पहले उन्हें सूरत बुलाकर मारने की योजना थी. लेकिन कमलेश जब नहीं आए तब शेख अशफाक हुसैन और पठान मोइनुद्दीन अहमद उर्फ़ फरीद को हत्या के लिए लखनऊ भेजा गया था.मौलाना मोहसिन शेख सलीम, फैजान और राशिद अहमद पठान ने कबूला है कि वर्ष 2015 में उन्होंने कमलेश तिवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था. इसके बाद उन्होंने कमलेश की हत्या के लिए कई बार मीटिंग की थी.

पूंछताछ में जानकारी सामने आई है कि मौलाना मोहसिन शेख सलीम बार-बार हत्या की योजना को पूरा करने की बात करता था. सोशल मीडिया पर कमलेश की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. उन्मादी इस बात की कोशिश भी कर रहे थे कि किसी तरह कमलेश तिवारी सूरत आ जाएं ताकि उनका क़त्ल किया जा सके. लंबे समय तक जब कमलेश के वहां आने की कोई संभावना नहीं दिखी तो 15 अक्टूबर को फिर बैठक की गई. इसमें अशफाक और मोइनुद्दीन हत्या करने के लिए लखनऊ आने को तैयार हो गए थे.

फ़िलहाल कमलेश तिवारी के दोनों हत्यारों अशफाक तथा मोइनुद्दीन को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर से सात युवकों को हिरासत में लिया गया है. इन सात लोगों ने हत्यारों की मदद की थी, जिसके कारण हत्यारे लोकेशन बदलते रहे. इनकी मदद से ही रविवार को नेपाल भागने की कोशिश भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली थी. कमलेश की हत्या के बाद हत्यारे मोइनुद्दीन और अशफाक बरेली में ठहरे थे. सर्विलांस के जरिये पता चला कि दोनों बरेली, पीलीभीत व शाहजहांपुर में कुछ लोगों के संपर्क में थे.

इसके बाद रविवार रात से ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी गई. इस दौरान बरेली से पांच व पीलीभीत से एक युवक को पकड़ा गया, जबकि शाहजहांपुर से एक कार चालक को हिरासत में लिया गया. इसी दौरान बरेली से मौलाना सैयद कैफ़ी अली को भी गिरफ्तार किया गया था. शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि बरेली इन पांचों युवकों ने उनके रुकने और खाने-पीने का इंतजाम कराया था. पीलीभीत के शेरपुर कला गांव से जिस युवक को पकड़ा गया, वह भी फोन पर लगातार संपर्क में बना हुआ था.

इसके अलावा शाहजहांपुर में जिस इनोवा कार चालक को पकड़ा गया, वह दोनों हत्यारोपितों को रविवार को पलिया (लखीमपुर खीरी) से शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन तक लेकर आया था. कार चालक ने पूछताछ में बताया कि रविवार को उसे दोनों पलिया में मिले थे. वहीं से दोनों ने कार नेपाल बॉर्डर तक ले जाने के लिए बुक की थी. नेपाल सीमा तक पहुंचने में शाम के सात बज गए और बॉर्डर का गेट बंद हो चुका था. इसके कारण दोनों आगे नहीं जा सके. दोनों ने चालक से उन्हें शाहजहांपुर तक छोड़ने के लिए कहा था. इस पर वह उन्हें शाहजहांपुर ले आया था.

ये भी जानकारी मिली है उन्मादियों की साजिश की जानकारी उनके कई साथियों को थी. बताया जा रहा है कि सूरत के कई लोग साजिश में शामिल थे. इनमें से कुछ घर छोड़कर फरार हैं, जिनके बारे में गुजरात पुलिस पता लगा रही है. ट्रांजिट रिमांड पर लिए गए आरोपित मौलाना शेख सलीम, फैजान और राशिद अहमद पठान ने बताया कि सूरत रेलवे स्टेशन से उन लोगों ने अपने एक करीबी शेख से असलहा लिया था.


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