Reason Of Result- खट्टर की ख़ामोशी को उनकी कमजोरी समझना साबित हुई बड़ी भूल. हरियाणा में भाजपा की जड़े बहुत गहरी निकलीं

चुनावी नतीजो ने भले ही जनता के आपेक्षित परिणाम दिए हो लेकिन इस से सबसे ज्यादा चौंक रहे हैं विपक्ष के नेता. इन सभी ने अपने अपने हिसाब से अपने अपने राजनैतिक परिणाम निर्धारित किये थे . जनता का रुख इन्होने नजरअंदाज किया और उसके बाद एक्जिट पोल के नतीजो को भी सिरे से ख़ारिज किया . मतलब जनता और मीडिया बार बार चेतावनी दे रही थी कि अभी समय है कि सुधर जाओ लेकिन न जाने किस सोच में डूबे विपक्ष ने इन संकेतों को देख कर भी अनदेखा कर दिया ..

फिलहाल बात करते हैं हरियाणा की.. मनोहर लाल खट्टर के नेत्रित्व में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सफलता के साथ एक लम्बा समय तय किया है . कहना गलत नहीं होगा कि वहां पर विधानसभा चुनाव सर पर हैं जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है .. इस लोकसभा चुनाव को वहां की प्रादेशिक सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था जिसमे सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा दांव पर मनोहर लाल खट्टर की थी . ये देखना था कि जनता उन से कितनी खुश थी और आख़िरकार फैसला आ ही गया .

विदित हो कि मनोहर लाल खट्टर की ख़ामोशी को उनकी कमजोरी समझने वालों को जनता के शोर से मिला है जवाब . हरियाणा में एकतरफा जीत दर्ज कर के भारतीय जनता पार्टी ने किसी भी सीट पर किसी अन्य का खाता खुलना तो दूर किसी को लड़ाई में भी नहीं आने दिया . हरियाणा में लगभग हर क्षेत्र से सेना का एक जवान भारत की रक्षा में तैनात है और सेना के शौर्य पर सवाल उठाने वालों से निश्चित रूप से पूरा क्षेत्र आहात हो रहा था जिसने जवाब अपने आक्रोश से दिया है .

इसके अलावा भी शुरुआत में जातिवादी विवाद पैदा कर के भी बहुत हंगामा खड़ा करने का प्रयास किया गया .. तथाकथित आंदोलनों के नाम पर एक शांतिपूर्ण समाज को बनदाम करने की कोशिश की गई. लेकिन खट्टर ने कुशलता से उन सभी बाधाओ को पार किया और दुष्टों का दमन भी किया .. कानून व्यवस्था के साथ विकास आदि कार्यों में भी समाज की खट्टर सरकार को क्लीन चिट मिलती दिखाई दे रही है और ये कहना गलत नहीं होगा कि खट्टर को खमोश देख कर विपक्ष ने उनको कमतर आंका जो उनके लिए सुखद फल नही दे पाया .

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