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हिन्दू पूजा पद्धति शामिल की जाए पाठ्यक्रम में, यही है संसार को सत्मार्ग पर लाने का विकल्प – भाजपा विधायक

भाजपा सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखकर देश के स्कूली पाठ्यक्रमों में कर्मकाण्ड़ की शिक्षा को शामिल करने की मांग की है। ऋषि और कृषि परंपरा को भारतीय समाज का आधार बताते हुए मस्त ने देश की शिक्षा व्यवस्था में कर्मकाण्ड को बढ़ावा देने की बात की है। और अपने संसदीय निधि से उन्होंने अपने क्षेत्र में कर्मकाण्ड के विद्यालय खोलने का ऐलान भी किया है।

कर्मकाण्ड और कृषि के बीच सीधा संबंध बताते हुए भाजपा सांसद ने कहा है कि कर्मकाण्ड की शिक्षा से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मस्त के इस कर्मकाण्ड की शिक्षा का अर्थ सीधे वैदिक पूजा, पाठ और यज्ञ एंव पुरातन संस्कार हैं। मस्त ने आगे कहा कि कर्मकाण्ड हमारे संस्कृति का ही मूल तत्व नहीं है। वरन इसका सीधा सम्बन्ध कृषि की जीवन धारा से भी है। यह पहल ऋषि-कृषि परंपरा को देश में आगे ले जाएगा।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर को खत लिखकर मस्त ने उनसे आग्रह किया है कि वे पुरे देश में इस ऋषि-कृषि परंपरा को आगे ले जाने की योजना पर विचार करते हुए सभी संस्कृत विद्यालयों में कर्मकाण्ड की शिक्षा देने की व्यवस्था बनवाने में सहयोग करें।

यह भारतीय सनातन परंपरा के समरसता का माध्यम भी होगा। उन्होंने कहा है कि समाज में फैल रही तमाम कुरूतियों और उसके स्तर में आ रही गिरावट को रोकने का मार्ग भी कर्मकाण्डो से होकर निकलेगा। भाजपा सांसद ने अपनी संसदीय क्षेत्र में इसका पहल कर देश के मानव संसाधन विकास मंत्री से मांग की है कि वे इस पहल को पूरे देश में शुरू करें।

अपने संसदीय क्षेत्र भदोही में कर्मकाण्ड की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वीरेन्द्र सिंह मस्त ने अपने सांसद निधि से एक करोड़ रूपये देने का ऐलान किया है।

उन्होंने कहा है कि इस राशि से वे अपने संसदीय क्षेत्र में 10 कर्मकाण्ड विद्यालय स्थापित करेंगे। उनका कहना है कि भारतवर्ष ऋषि और कृषि परंपरा का देश है। प्राचीन भारत की कृषि ऋषियों के मार्गदर्शन पर ही संचालित होती रही है।

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