वो मांग जिसे उठाया था सुदर्शन न्यूज़ ने ऑपरेशन इतिहास में, अब होने जा रही पूरी.. हिंदू सम्राटों को अब जानेगा संसार


राष्ट्र तथा धर्म के लिए पूर्ण समर्पित सुदर्शन न्यूज़ की एक और मुहिम सफल होने जा रही है. ऑपरेशन इतिहास नाम से सुदर्शन ने जिस मुहिम को चलाया था, वह केंद्र की मोदी सरकार के एजेंडे में आ गया है. ऑपरेशन इतिहास नामक मुहिम में सुदर्शन ने मांग की थी कि हिंदुस्तान के गौरवशाली तथा शौर्यवान हिन्दू राजाओं को जगह दी जाए तथा नकली इतिहासकारों द्वारा लिखी गई इतिहास की किताबों में बदलाव किया जाए ताकि भारत की युवा पीढी अपने वास्तविक इतिहास को जान सके, अपने पूर्वजों को जान सके.

सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, अब भारतीय जनता पार्टी ऐसे हिंदू राजाओं को सामने लाने जा रही है, जो इतिहास की गुमनामी में हैं. कुछ का जिक्र मिलता भी है, तो उन्हें उतना महत्व नहीं दिया गया है. ऐसे राजाओं को खोजकर भाजपा उन्हें राष्ट्र नायक के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बना रही है. भाजपा का भी मनाना है कि कई ऐसे कई हिंदू राजा हुए हैं, जो राष्ट्र के हित में जुटे रहे, किन्तु इतिहासकारों की उपेक्षा के कारण वे गुमनाम रहे. उनके पराक्रम की वजह से हिंदू संस्कृति और सभ्यता को बचाया गया था, इसलिए उनके इतिहास को सामने लाना जरूरी है.

बता दें कि हाल ही में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में दो दिन की संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जहाँ सभी को स्कंदगुप्त के बारे में बताया गया. संगोष्ठी में पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के बारे में बताया कि इनके साथ इतिहास में बहुत नाइंसाफी हुई है. उन्हें इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे. इस संगोष्ठी के बाद लोगों के मन में उत्सुकता जागी कि आखिर स्कंदगुप्त थे कौन, जिनके जीवन का आधार बनाकर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

एक RSS प्रचारक ने बताया है कि स्कंदगुप्त, सुहेलदेव, हेमचंद्र विक्रमादित्य, दक्षिण के आंध्र प्रदेश में विजयनगर के कृष्णदेव राय जैसे प्राचीन राजाओं को लोग कम जानते हैं. पुरु (पोरस) ने तो सिकंदर को भी मात दी थी. इसके बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं प्राप्त हुआ, जिसके वे हकदार थे. इसी तरह असम के लाक्षित बड़फुकन का जिक्र इतिहास में कहीं नहीं मिलता है. इन सभी शासकों ने आर्य संस्कृति की रक्षा की थी. वीर बंदा बैरागी जैसे लोगों ने धर्म और संस्कृति के लिए लड़ाइयां लड़ीं, किन्तु आज ये गुमनाम हैं. उन्होंने कहा कि अब वो समय आ गया है जब इन महानतम राजाओं को इतिहास में न सिर्फ शामिल किया जाए, बल्कि इनके बारे में लोगों को बताया भी जाए.


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